सबद 91: छन्दे मन्दे बालक बुद्धे
शब्दवाणी का सबद 91 "छन्दे मन्दे बालक बुद्धे" से शुरू होता है। इसमें 9 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् छन्दे मन्दे बालक बुद्धे, कूड़े कपटे ऋद्ध न सिद्धे।मेरे गुरु जो दीन्ही शिक्षा, सर्व अलिंगण फेरी दीक्षा।जाण अजाण बहिया जब जब, सर्व अलिंगण मेटे तब तब।ममता हस्ती बांध्या काल, काल पर काले पसरत डाल।ध्यान न डोले मन न टले, अहनिश ब्रह्म ज्ञान उचरै।काया पत नगरी मन पत राजा, पंच आत्मा परिवारूं।है कोई आछै मही मण्डल शूरा, मनराय सूं झूझ रचायले।अथगा थगाय ले अबसा बसायले, अनवे माघ पाल ले।सत सत भाषत गुरु रायों, जरा मरण भो भागूं।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 91 कौन सा है?
सबद 91 की पहली पंक्ति है: ओ३म् छन्दे मन्दे बालक बुद्धे, कूड़े कपटे ऋद्ध न सिद्धे।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
