सबद 82: अलख अलख तूं अलख न लखणा
शब्दवाणी का सबद 82 "अलख अलख तूं अलख न लखणा" से शुरू होता है। इसमें 2 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् अलख अलख तूं अलख न लखणा, तेरा अनन्त इलोलूं।कौण सी तेरी करणी पूजै, कौण सै तिहिं रूप स तूलूं।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 82 कौन सा है?
सबद 82 की पहली पंक्ति है: ओ३म् अलख अलख तूं अलख न लखणा, तेरा अनन्त इलोलूं।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
