॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ॥
Jambh Bhakti (जम्भ भक्ति) logo

भजन · आरती · मंत्र

शब्दवाणी • सबद 33 / 120

सबद 33: कवण न हुवा कवण न होयसी

शब्दवाणी का सबद 33 "कवण न हुवा कवण न होयसी" से शुरू होता है। इसमें 12 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।

गुरु जम्भेश्वर भगवान की वाणी • मूल पाठ
शेयर करें:WhatsAppFacebookTelegram

ओ३म् कवण न हुवा कवण न होयसी, किण न सह्या दुख भारूं।कवण न गइयां कवण न जासी, कवण रह्या संसारूं।अनेक अनेक चलंता दीठा, कलि का माणस कौन विचारूं।जो चित होता सो चित नाही, भल खोटा संसारूं।किसकी माई किसका भाई, किसका पख परवारूं।भूली दुनिया मर मर जावै, न चीन्हों करतारूं।विष्णु विष्णु तूं भण रे प्राणी, बल बल बारम्बारूं।कसणी कसबा भूल न बहबा, भाग परापति सारूं।गीता नाद कविता नाऊं, रंग फटारस टारूं।फोकट प्राणी भरमें भूला, भल जे यो चीन्हों करतारूं।जामण मरण बिगोवो चूकै, रतन काया ले पार पहुँचे।तो आवागवण निवारूं।

शब्दवाणी का पाठ

बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती

सभी सबद

शब्दवाणी: सभी सबदों की पहली पंक्ति के साथ सूची

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शब्दवाणी का सबद 33 कौन सा है?

सबद 33 की पहली पंक्ति है: ओ३म् कवण न हुवा कवण न होयसी, किण न सह्या दुख भारूं।

शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?

शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।