
संकटा माता व्रत कथा (Sankata Mata Vrat Katha)
एक बुढ़िया थी, उस बुढ़िया का एक बेटा था जिसका नाम था
माँ दुर्गा, अम्बे, काली, पार्वती और सभी देवी माँ के भजन, आरती, चालीसा और स्तोत्र।

एक बुढ़िया थी, उस बुढ़िया का एक बेटा था जिसका नाम था

विजया पार्वती व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार किसी समय कौडिन्य नगर

एक बार महादेवजी पार्वती सहित नर्मदा के तट पर गए। वहाँ एक

शुक्रवार के दिन माँ संतोषी का व्रत-पूजन किया जाता है। इस पूजा

एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ,

श्री गौ अष्टोत्तर नामावलि – गौ माता के 108 नाम ॐ कपिला

ॐ प्रकृत्यै नमः ॥ ॐ विकृत्यै नमः ॥ ॐ विद्यायै नमः ॥

॥ श्रीतुलसी अष्टोत्तरशतनामावली ॥ ॐ श्री तुलस्यै नमः । ॐ नन्दिन्यै नमः

॥ श्रीसरस्वती अष्टोत्तरनामावली ॥ ॐ सरस्वत्यै नमः । ॐ महाभद्रायै नमः ।

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी । प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी

॥ भवानी अष्टकम ॥ न तातो न माता न बन्धुर्न दाता न

1. सती- अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली 2. साध्वी-

❀ सामूहिक कल्याण के लिये मंत्र – देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या

ध्यान दें- श्री विद्या मंत्र दीक्षित व्यक्ति इस सहस्रनाम करने के अधिकारी

माँ दुर्गा की पूजा समाप्ति पर करें ये स्तुति, तथा पूजा में

देवी कवच | श्री दुर्गा कवच कवच का अर्थ होता है रक्षा

प्रथम पुष्पांजली मंत्र ॐ जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी । दुर्गा, शिवा,

जय शिवशंकर, जय गंगाधर, करुणाकर करतार हरे, जय कैलाशी, जय अविनाशी, सुखराशी

नमो भूथ नाधम नमो देव देवं, नाम कला कालं नमो दिव्य थेजं,

श्री गंगा जी की स्तुति गांगं वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतम् । त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि