॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ॥
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भजन · आरती · मंत्र

शब्दवाणी • सबद 83 / 120

सबद 83: जो नर घोड़े चढ़े पाघ न बांधै

शब्दवाणी का सबद 83 "जो नर घोड़े चढ़े पाघ न बांधै" से शुरू होता है। इसमें 6 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।

गुरु जम्भेश्वर भगवान की वाणी • मूल पाठ
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ओ३म् जो नर घोड़े चढ़े पाघ न बांधै, ताकि करणी कौन विचारूं।शुचियारा होयसी आय मिलसी, करड़ा दो जग खारूं।जीव तड़ै को रिजक न मेटूं, मूवा परहथ सारूं।हाथ न धोवै पग न पखालै, नहीं सुधी बुधि गिंवारूं।म्हे पहराजा सूं कौल ज लियो, नार सिंघ नर काजूं।जुग अनन्त अनन्त बरत्या, म्हे सुनि मण्डल का राजूं।

शब्दवाणी का पाठ

बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती

सभी सबद

शब्दवाणी: सभी सबदों की पहली पंक्ति के साथ सूची

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शब्दवाणी का सबद 83 कौन सा है?

सबद 83 की पहली पंक्ति है: ओ३म् जो नर घोड़े चढ़े पाघ न बांधै, ताकि करणी कौन विचारूं।

शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?

शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।