सबद 45: दोय मन दोय दिल सिवी न कंथा
शब्दवाणी का सबद 45 "दोय मन दोय दिल सिवी न कंथा" से शुरू होता है। इसमें 13 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् दोय मन दोय दिल सिवी न कंथा, दोय मन दोय दिल पुली न पंथा।दोय मन दोय दिल कही न कथा, दोय मन दोय दिल सुणी न कथा।दोय मन दोय दिल पंथ दुहेला, दोय मन दोय दिल गुरु न चेला।दोय मन दोय दिल बंधी न बेला, दोय मन दोय दिल रब्ब दुहेला।दोय मन दोय दिल सूई न धागा, दोय मन दोय दिल भिड़े न भागा।दोय मन दोय दिल भेव न भेऊं, दोय मन दोय दिल टेव न टेऊं।दोय मन दोय दिल केल न केला, दोय मन दोय दिल सुरग न मेला।रावल जोगी तां तां फिरियो, अण चीन्हैं के चाह्यो।कांहै काजै दिसावर खेलो, मन हठ सीख न कायों।थे जोग न जोग्या भोग न भोग्या, गुरु न चीन्हों रायों।कण विन कूकस कांये पीसों, निश्चय सरी न कायों।बिण पायचियें पग दुख पावै, अबधूं लोहै दुखी सकायों।पार ब्रह्म की सुद्ध न जांणी, तो नागे जोग न पायो।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 45 कौन सा है?
सबद 45 की पहली पंक्ति है: ओ३म् दोय मन दोय दिल सिवी न कंथा, दोय मन दोय दिल पुली न पंथा।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
