॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ॥
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भजन · आरती · मंत्र

शब्दवाणी • सबद 48 / 120

सबद 48: लक्ष्मण लक्ष्मण न कर आयसां

शब्दवाणी का सबद 48 "लक्ष्मण लक्ष्मण न कर आयसां" से शुरू होता है। इसमें 6 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।

गुरु जम्भेश्वर भगवान की वाणी • मूल पाठ
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ओ३म् लक्ष्मण लक्ष्मण न कर आयसां, म्हारे साधां पड़ै बिराऊं।लक्ष्मण सो जिन लंका लीवी, रावण मार्यो ऐसो कियो संग्रामूं।लक्ष्मण तीन भवन का राजा, तेरे एक न गाऊं।लक्ष्मण के तो लख चौरासी जीया जूणी, तेरे एक न जीऊं।लक्ष्मण तो गुणवंतो जोगी, तेरे बाद विराऊं।लक्ष्मण का तो लक्षण नांही, शीस किसी विध नाऊं।

शब्दवाणी का पाठ

बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती

सभी सबद

शब्दवाणी: सभी सबदों की पहली पंक्ति के साथ सूची

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शब्दवाणी का सबद 48 कौन सा है?

सबद 48 की पहली पंक्ति है: ओ३म् लक्ष्मण लक्ष्मण न कर आयसां, म्हारे साधां पड़ै बिराऊं।

शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?

शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।