जांभोजि द्वारा किए गए प्रश्न बिश्नोई समाज के बारे में? भगवान श्री जाम्भोजी और उनके परम शिष्य रणधीर जी का प्रश्नोत्तर दिया गया है जिसका वर्णन सार-संग्रह के रूप में लिया गया है। एक समय भगवान श्री जांभोजी के पास

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               गुरु आसन समराथल भाग 4 (Samarathal Dhora Katha) श्री देवजी कहते है कि मैं सर्वत्र व्यापक होकर, सभी जोव – योनियों में प्रवेश करता हूं तथा उनका पालण पोषण भी एक क्षण में

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                  गुरु आसन समराथल भाग 3 (Samarathal Dhora ) मेरे पास पापो का खण्डन करने के चार साधन है प्रथम नाद,वेद,शील,और शब्द। इन साधनो की महता बढ़ती है तो पाप भाग जाते

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गुरु आसन समराथल भाग 2 ( Samarathal Katha ) हे कृष्ण! भजन योग्य तो भगवान है उसका भजन नहीं किया, सुनने योग्य भगवान की कथा लीला है उसको नहीं सुना। कथन करने योग्य जो भगवान की कथा- नाम है वह

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              सेंसेजी का अभिमान खंडन भाग 3 सैंसे भक्त के साथ उपस्थित जमाती के लोगों ने पूछा- हे गुरुदेव! इन चार युगों में कोई संसार सागर से पार पहुंचा या नहीं। जाम्भोजी ने उतर देते

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             सेंसेजी का अभिमान खंडन भाग 2 गृहलक्ष्मी कहने लगी- हे योगी। खिड़की पकड़े हुए क्यों खड़ा है? जिस प्रकार कर्जा लेने वाला खड़ा रहता है उसी प्रकार से खड़ा हुआ क्या देख रहा है।

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