सबद 70: हक हलालूं हक साच कृष्णों
शब्दवाणी का सबद 70 "हक हलालूं हक साच कृष्णों" से शुरू होता है। इसमें 10 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् हक हलालूं हक साच कृष्णों, सुकृत अहल्यो न जाई।भल बाहिलो भल बीजीलो, पवणा बाड़ बलाई।जीव के काजै खड़ो जे खेती, तामै ले रखवालो रे भाई।दैतानी शैतानी फिरैला, तेरी मत मोरा चर जाई।उनमन मनवां जीव जतन कर, मन राखिलों ठाई।जीव के काजै खड़ो ज खेती, वाय दवाय न जाई।न तहां हिरणी न तहां हिरणा, न चीन्हों हरि आई।न तहां मोरा न तहां मोरी, न ऊंदर चर जाई।कोई गुरु कर ज्ञानी तोड़त मोहा, तेरो मन रखवालो रे भाई।जो आराध्यो राव युधिष्ठिर, सो आराधों रे भाई।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 70 कौन सा है?
सबद 70 की पहली पंक्ति है: ओ३म् हक हलालूं हक साच कृष्णों, सुकृत अहल्यो न जाई।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
