सबद 99: साच सही म्हे कूड़ न कहिबा
शब्दवाणी का सबद 99 "साच सही म्हे कूड़ न कहिबा" से शुरू होता है। इसमें 12 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् साच सही म्हे कूड़ न कहिबा, नेड़ा था पण दूर न रहीबा।सदा संतोषी सत उपकरणां, म्हे तजिया मान अभिमानूं।बसकर पवना बस कर पाणी, बस कर हाट पटण दरवाजो।दशे दवारे ताला जड़ीया, जो ऐसा उस ताजों।दशे दवारे ताला कूंची, भीतर पोल बणाई।जो आराध्यों राव युधिष्ठिर, सो आराधो रे भाई।जिहिं गुरु कै झुरैन झुरबा, खिरै न खिरणा, बंक तृबंकै।नाल पै नालै, नैणे नीर न झुरबा, बिन पुल बंध्या बांणों।दुर्लभ देशा गरजियो बूठो घट घट मांह, बाहर थांते उबरियां भीगा मन्दिर रे मांय।छन पुराणी छज नवों चुंय चुंय पड़े मजीठ, लाखों इण पर चेतियां जाय बसिया वैकुण्ठ।तज्या अलिंगण तोड़ी माया, तन लोचन गुण बाणों।हालीलो भल पालीलो सिध पालीलो, खेड़त सूना राणों।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 99 कौन सा है?
सबद 99 की पहली पंक्ति है: ओ३म् साच सही म्हे कूड़ न कहिबा, नेड़ा था पण दूर न रहीबा।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
