सबद 86: जुग जागो जुग जाग पिराणी
शब्दवाणी का सबद 86 "जुग जागो जुग जाग पिराणी" से शुरू होता है। इसमें 18 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् जुग जागो जुग जाग पिराणी, कांय जागंता सोवो।भल के बीर बिगोवो होयसी, दुसमन कांय लकोवो।ले कूंची दरबान बुलावो, दिल ताला दिल खोवो।जंपो रे जिण जंप्यो जणीयर, जपसी सो जिण हारी।लह लह दांव पड़न्ता खेलो, सुर तेतीसां सारी।पवन बंधान काया गढ़ काची, नीर छलै ज्यूं पारी।पारी बिनसै नीर ढ़ुलैलो, ओ पिण्ड कामन कारी।काची काया दृढ़ कर सींचो, ज्यूं माली सींचै बाड़ी।ले काया बासन्दर होमो, ज्यूं इन्धन की भारी।शील स्नाने संजमें चालो, पाणी देह पखाली।गुरु के वचने निंव खिंव चालो, हाथ जपो जप माली।वस्तु पियारी खरचों क्यूं नांही, किहिं गुण राखो टाली।खरचे लाहो राखे टोटो, बिबरस जोय निहाली।घर आगी इत गोवल वासो, कूड़ी आधो चारी।सुकरत जीव सखायत होयसी, हेत फलै संसारी।आज मूवा कल दूसर दिन है, जो कुछ सरै तो सारी।पीछे कलियर कागा रोलो, रहसी कूक पुकारी।ताण थकै क्यूं हार्यो नाही, मुरखा अवसर जोला हारी।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 86 कौन सा है?
सबद 86 की पहली पंक्ति है: ओ३म् जुग जागो जुग जाग पिराणी, कांय जागंता सोवो।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
