सबद 72: वेद कुराण कुमाया जालूं
शब्दवाणी का सबद 72 "वेद कुराण कुमाया जालूं" से शुरू होता है। इसमें 12 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् वेद कुराण कुमाया जालूं, भूला जीव कुजीव कु जाणी।वसंदर नही नख हीरूं, धर्म पुरुष सिरजीवै पुरूं।कलि का माया जाल फिटा कर प्राणी, गुरु की कलम कुराण पिछणी।दीन गुमान करीलो ठाली, ज्यूं कण घातै घुण हांणी।साच सिदक शैतान चुकावों, ज्यूं तिस चुकावै पाणी।मैं नर पूरा सरविण जो हीरा, लेसी जांकै हृदय लोयण, अन्धा रह्या इंवाणी।निरख लहो नर निरहारी, जिन चोखंड भीतर खेल पसारी।जंपो रे जिण जंपै लाभै, रतन काया एह कहाणी।काही मारू काही तारूं, किरिया बिहूणा पर हथ सारूं।शील दहूं उबारूं ऊन्हें, एकल एह कहाणी।केवल ज्ञानी थलसिर आयो, परगट खेल पसारी।कोड़ तेतीसों पोंह रचावण हारी, ज्यूं छक आयी सारी।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 72 कौन सा है?
सबद 72 की पहली पंक्ति है: ओ३म् वेद कुराण कुमाया जालूं, भूला जीव कुजीव कु जाणी।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
