सबद 52: मोह मण्डप थाप थापले
शब्दवाणी का सबद 52 "मोह मण्डप थाप थापले" से शुरू होता है। इसमें 4 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् मोह मण्डप थाप थापले, राख राखले, अधरा धरूं।आदेश वेसूं ते नरेसूं, ते नरा अपरंपारूं।रण मध्ये से नर रहियों, ते नरा अडरा डरूं।ज्ञान खड़गूं जथा हाथे, कौण होयसी हमारा रिपूं।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
सभी सबद
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 52 कौन सा है?
सबद 52 की पहली पंक्ति है: ओ३म् मोह मण्डप थाप थापले, राख राखले, अधरा धरूं।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
