सबद 55: रणघटिये कै खोज फिरन्ता
शब्दवाणी का सबद 55 "रणघटिये कै खोज फिरन्ता" से शुरू होता है। इसमें 5 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् रणघटिये कै खोज फिरन्ता, सुण सेवन्ता, खोज हस्ती को पायो।लूंकड़िये को खोज फिरंता, सुण सेवन्ता, खोज सुरह को पायो।मोथड़िये के गूंढ़ खणंन्ता सुण सेवन्ता, लाधों थान सुथानों।रांघड़ियों को घाट घड़न्ता, सुण सेवन्ता कंचन सोनो डायो।हस्ती चड़न्ता गेवर गुड़न्ता, सुणही सुणहा भूंकत कायों।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 55 कौन सा है?
सबद 55 की पहली पंक्ति है: ओ३म् रणघटिये कै खोज फिरन्ता, सुण सेवन्ता, खोज हस्ती को पायो।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
