सबद 92: काया कोट पवन कुटवाली
शब्दवाणी का सबद 92 "काया कोट पवन कुटवाली" से शुरू होता है। इसमें 7 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् काया कोट पवन कुटवाली, कुकर्म कुलफ बणायो।माया जाल भरम का संकल, बहु जुग रहीयो छयो।पढ़ वेद कुराण कुमाया जालों, दंत कथा जुग छयो।सिध साधक को एक मतो, जिन जीवत मुक्त दृढ़ायो।जुगां जुगां को जोगी आयो, सतगुरु सिद्ध बतायो।सहज स्नानी केवल ज्ञानी, ब्रह्मज्ञानी, सुकृत अहल्यो न जाई।क्यूं क्यूं भणता क्यूं क्यूं सुणता, समझ विना कुछ सिद्धि न पाई।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 92 कौन सा है?
सबद 92 की पहली पंक्ति है: ओ३म् काया कोट पवन कुटवाली, कुकर्म कुलफ बणायो।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
