॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ॥
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भजन · आरती · मंत्र

शब्दवाणी • सबद 73 / 120

सबद 73: हरी कंकेहड़ी मंडप मैड़ी

शब्दवाणी का सबद 73 "हरी कंकेहड़ी मंडप मैड़ी" से शुरू होता है। इसमें 10 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।

गुरु जम्भेश्वर भगवान की वाणी • मूल पाठ
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ओ३म् हरी कंकेहड़ी मंडप मैड़ी, जहां हमारा वासा।चार चक नव दीप थर हरे, जो आपो परकासूं।गुणियां म्हारा सुगणां चेला, म्हे सुगणां का दासूं।सुगणां होयसी सुरगे जास्ये, नुगरा रह्या निरासूं।जाका थान सुहाया घर बैकुण्ठे, जाय संदेशो लायौं।अमियां ठमियां अमृत भोजन, मनसा पालंग सेज निहाल बिछयो।जागो जोवो जोत न खोवो, छल जासी संसारूं।भणी न भणबा, सुणी न सुणबा, कही न कहबा, खड़ी न खड़बा।रे! भल कृषाणी, ताकै करण न घातो हेलो।कलीकाल जुग बरते जैलो, तातै नहीं सुरां सों मेलों।

शब्दवाणी का पाठ

बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती

सभी सबद

शब्दवाणी: सभी सबदों की पहली पंक्ति के साथ सूची

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शब्दवाणी का सबद 73 कौन सा है?

सबद 73 की पहली पंक्ति है: ओ३म् हरी कंकेहड़ी मंडप मैड़ी, जहां हमारा वासा।

शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?

शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।