सबद 109: देखत भूली को मनमानै
शब्दवाणी का सबद 109 "देखत भूली को मनमानै" से शुरू होता है। इसमें 4 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् देखत भूली को मनमानै, सेवै बिलोवै बाझ सनाने देखत भूली को मन चैवै, भीतर कोरा बाहर भैवै।देखत भूली को मन मांनै, हरि पर हर मिलियो शैताने देखत भूली को मन चेवै, आक बखाणै थंदे मेवै।भूला लो भल भूला लो, भूला भूल न भूलूं।जिहिं ठुंठड़िये पान न होता, ते क्यूं चाहत फूलूं।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 109 कौन सा है?
सबद 109 की पहली पंक्ति है: ओ३म् देखत भूली को मनमानै, सेवै बिलोवै बाझ सनाने देखत भूली को मन चैवै, भीतर कोरा बाहर भैवै।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
