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राजस्थान • समाज • धाम • मेले की तारीख

राजस्थान के लोकदेवता और कुलदेवियाँ

राजस्थान में हर समाज और कई परिवारों के अपने लोकदेवता और कुलदेवी होते हैं। लोकदेवता वे वीर और संत हैं जिन्होंने गायों, कमज़ोरों और अपने वचन की रक्षा के लिए जीवन दिया, जैसे बाबा रामदेव जी, वीर तेजाजी, गोगाजी, पाबूजी और देवनारायण जी। कुलदेवी किसी वंश या गोत्र की रक्षक देवी होती हैं। यहाँ इनके धाम, मुख्य मेले की अगली तारीख और समाज के अनुसार सबसे प्रचलित आराध्य दिए गए हैं।

अपडेट: 8 नवंबर 2026 • तारीखें: जम्भ भक्ति पंचांग (सूर्योदय की तिथि)
अगला मेला
13 फ़रवरी 2027, शनिवार
माघ शुक्ल सप्तमी • मालासेरी डूंगरी (भीलवाड़ा)
97 दिन बाकी
6लोकदेवता और देवी पर पूरे लेख
14समाज और वंश के आराध्य
5पंच पीर की जानकारी
हर सालमेले की तारीख अपने आप अपडेट

प्रमुख लोकदेवता और अगले मेले की तारीख

नीचे हर लोकदेवता का मुख्य पर्व उसकी अगली तारीख के क्रम में है। सबसे पहले वाला मेला सबसे पास है। नाम पर क्लिक करके पूरी कथा, परंपराएँ और धाम तक पहुँचने का रास्ता पढ़ें।

अगली तारीखलोकदेवता और पर्वतिथि और धाम
13फ़रशनिवार
फ़रवरी 2027
भगवान देवनारायण जीदेवनारायण जयंती
माघ शुक्ल सप्तमीमालासेरी डूंगरी (भीलवाड़ा)
6अप्रैमंगलवार
अप्रैल 2027
पाबूजी राठौड़कोलू का मेला
चैत्र अमावस्याकोलू (फलोदी)
7अप्रैबुधवार
अप्रैल 2027
करणी माताचैत्र नवरात्रि मेला
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमीदेशनोक (बीकानेर)
26अगगुरुवार
अगस्त 2027
गोगाजी (जाहरवीर)गोगा नवमी
भाद्रपद कृष्ण नवमीगोगामेड़ी (हनुमानगढ़), ददरेवा (चूरू)
2सितगुरुवार
सितंबर 2027
बाबा रामदेव जीबाबा रामदेव जयंती (बाबा री बीज) और भादवा मेला शुरू
भाद्रपद शुक्ल द्वितीयारामदेवरा (रुणिचा), जैसलमेर
10सितशुक्रवार
सितंबर 2027
वीर तेजाजीतेजा दशमी
भाद्रपद शुक्ल दशमीखरनाल (नागौर), सुरसुरा (अजमेर), परबतसर

तारीखें जम्भ भक्ति के अपने पंचांग से निकाली गई हैं और हर साल अपने आप अगले साल की हो जाती हैं।

समाज के अनुसार आराध्य और कुलदेवी (सबसे प्रचलित मान्यताएँ)

समाज / वंशआराध्य या कुलदेवीमुख्य धामपढ़ें
बिश्नोईगुरु जम्भेश्वर भगवान (जाम्भोजी)मुकाम, समराथल धोरा (बीकानेर)बिश्नोई कैलेंडर, शब्दवाणी
जाटवीर तेजाजी (लोकदेवता)। कुलदेवी गोत्र के अनुसार अलग।खरनाल (नागौर), सुरसुरा (अजमेर)वीर तेजाजी
गुर्जरभगवान देवनारायण जीसवाई भोज (आसींद), मालासेरी डूंगरीदेवनारायण जी
राईका-रेबारीपाबूजी राठौड़कोलू (फलोदी)पाबूजी
चारणकरणी माता, आवड़ मातादेशनोक (बीकानेर)करणी माता
मेघवाल और सभी समाजबाबा रामदेव जीरामदेवरा (जैसलमेर)बाबा रामदेव जी
राठौड़नागणेची मातानागाणा (बाड़मेर)—
कछवाहाजमवाय माताजमवारामगढ़ (जयपुर)—
चौहानआशापुरा माता, जीण मातानाडोल (पाली), रेवासा (सीकर)—
सिसोदियाबाण मातामेवाड़—
भाटीस्वांगिया माता (आवड़ माता का रूप)जैसलमेर क्षेत्र—
जादौन (यदुवंशी)कैला देवीकरौली—
ओसवालसच्चियाय माताओसियां (जोधपुर)—
अग्रवालमहालक्ष्मीअग्रोहा धाम (हिसार, हरियाणा)—
ध्यान दें: एक ही समाज में गोत्र, खाँप और इलाके के हिसाब से कुलदेवी अलग-अलग हो सकती है। ऊपर सबसे ज़्यादा मानी जाने वाली परंपराएँ दी गई हैं। लोकदेवता किसी एक समाज तक सीमित नहीं होते, हर समाज के लोग उन्हें श्रद्धा से पूजते हैं। अपने समाज या गोत्र की जानकारी जुड़वाने या सुधार के लिए हमें लिखें।

राजस्थान के पंच पीर

राजस्थान में पाँच लोकदेवताओं को पंच पीर कहा जाता है: पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया और गोगाजी। इन सबकी कथाएँ गायों और कमज़ोरों की रक्षा, वचन निभाने और समाज में बराबरी की सीख देती हैं।

अपनी कुलदेवी कैसे पता करें?

  1. बुज़ुर्गों से पूछें: ज़्यादातर परिवारों में कुलदेवी की पूजा विवाह, मुंडन और जात-जडूला जैसे मौकों पर होती है, इसलिए घर के बड़े यह नाम जानते हैं।
  2. राव या भाट की बही: राजस्थान में कई समाजों की वंशावली राव या भाट (बही भाट) रखते हैं। उनकी बही में कुल, गोत्र और कुलदेवी का नाम लिखा होता है।
  3. गोत्र के दूसरे परिवार: एक गोत्र की कुलदेवी आमतौर पर एक ही होती है, इसलिए गोत्र के दूसरे परिवारों से भी पता कर सकते हैं।
  4. कुलगुरु या पुजारी: कुलगुरु या गाँव के पुराने मंदिर के पुजारी भी अक्सर यह जानकारी रखते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लोकदेवता किसे कहते हैं?

ऐसे वीर, संत या महापुरुष जिन्होंने लोगों, गायों या अपने वचन की रक्षा के लिए जीवन दिया और बाद में लोक आस्था में देवता के रूप में पूजे जाने लगे। जैसे बाबा रामदेव जी, वीर तेजाजी, गोगाजी, पाबूजी और देवनारायण जी।

कुलदेवी और इष्टदेव में क्या अंतर है?

कुलदेवी पूरे वंश या गोत्र की रक्षक देवी होती हैं, जिनकी पूजा पीढ़ियों से चलती है। इष्टदेव वह देवता हैं जिन्हें कोई व्यक्ति अपनी श्रद्धा से सबसे ज़्यादा मानता है।

राजस्थान के पंच पीर कौन हैं?

पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया और गोगाजी।

राठौड़ों की कुलदेवी कौन हैं?

राठौड़ वंश की कुलदेवी नागणेची माता मानी जाती हैं, जिनका प्राचीन मंदिर बाड़मेर ज़िले के नागाणा में है। बीकानेर के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी करणी माता भी मानी जाती हैं।

बिश्नोई समाज के आराध्य कौन हैं?

गुरु जम्भेश्वर भगवान (जाम्भोजी), जिन्होंने 29 नियम दिए। उनका समाधि स्थल मुकाम और तपोभूमि समराथल धोरा बीकानेर ज़िले में है।

अपनी कुलदेवी कैसे पता करें?

परिवार के बुज़ुर्गों, अपने राव या भाट की बही, गोत्र के दूसरे परिवारों या कुलगुरु से पता कर सकते हैं।

यह जानकारी कहाँ से है? यह जानकारी लोक परंपरा, इतिहास की पुस्तकों और समाज में प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। कई बातों पर अलग-अलग स्रोतों में थोड़ा अंतर मिलता है। कोई जानकारी गलत लगे या आप कुछ जोड़ना चाहें, तो हमें बताएँ। जाँच के बाद हम इसे ठीक करेंगे।

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