॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ॥
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भजन · आरती · मंत्र

शब्दवाणी • सबद 63 / 120

सबद 63: आतर पातर राही रूक्मण

शब्दवाणी का सबद 63 "आतर पातर राही रूक्मण" से शुरू होता है। इसमें 18 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।

गुरु जम्भेश्वर भगवान की वाणी • मूल पाठ
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ओ३म् आतर पातर राही रूक्मण, मेल्हा मन्दिर भोयों।गढ़ सोवनां तेपण मेल्हा, रहा छड़ा सी जोयो।रात पड़न्ता पाला भी जाग्या, दिवस तपंता सूरूं।उन्हां ठंडा पवना भी जाग्या, घन बरषंता नीरूं।दुनी तंणा औचाट भी जाग्या, के के नुगरा देता गाल गहीरूं।जिहिं तन ऊंना ओढ़ण ओढ़ा, तिहिं ओढ़ंता चीरूं।जां हाथे जप माली जपां, तहां जपंता हीरूं।बारा काजै पड़यो बिछेहो, संभल संभल झूरूं।राघों सीता हनवत पाखो, कौन बंधावत धीरूं।मागर मणिया काच कथिरूं, हीरस हीरा हीरूं।विखा पड़ता पड़ता आया, पूरस पूरा पूरूं।जे रिण राहे सूर गहीजै, तो सूरस सूरां सूरूं।दुखियां है जे सुखियां होयसै, करसै राज गहीरूं।महा अंगीठी बिरखा ओल्हो, जेठ न ठंडा नीरूं।पलंग न पोढ़ण सेज न सोवण, कंठ रूलंता हीरूं।इतना मोह न मानै शिम्भू, तही तही सूसीरूं।घोड़ा चोली बाल गुदाई, श्री राम का भाई, गुरु की वाचा बहियों।राघो सीता हनवंत पाखो दुख सुख कासूं कहियों।

शब्दवाणी का पाठ

बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती

सभी सबद

शब्दवाणी: सभी सबदों की पहली पंक्ति के साथ सूची

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शब्दवाणी का सबद 63 कौन सा है?

सबद 63 की पहली पंक्ति है: ओ३म् आतर पातर राही रूक्मण, मेल्हा मन्दिर भोयों।

शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?

शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।