सबद 80: जे म्हां सूता रैण विहावै
शब्दवाणी का सबद 80 "जे म्हां सूता रैण विहावै" से शुरू होता है। इसमें 7 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् जे म्हां सूता रैण विहावै, तो बरतै बिम्बा बारूं।चन्द भी लाजै सूर भी लाजै, लाजै धर गैणारूं।पवणा पाणी ये पण लाजै, लाजै बणी अठारा भारूं।सप्त पाताल फूणींन्दा लाजै, लाजै सागर खारूं।जम्बू दीप का लोइयां लाजै, लाजै धवली धारूं।सिध अरू साधक मुनिजन लाजै, लाजै सिरजन हारूं।सत्तर लाख असी पर जंपा, भले न आवै तारूं।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 80 कौन सा है?
सबद 80 की पहली पंक्ति है: ओ३म् जे म्हां सूता रैण विहावै, तो बरतै बिम्बा बारूं।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
