सबद 22: लो लो रे राजिंदर रायों
शब्दवाणी का सबद 22 "लो लो रे राजिंदर रायों" से शुरू होता है। इसमें 10 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् लो लो रे राजिंदर रायों, बाजै बाव सुवायो।आभै अमी झुरायो, कालर करसण कियो, नैपै कछू न कीयो।अइया उत्तम खेती, को को इमृत रायो, को को दाख दिखायो।को को ईख उपायो, को को नींब निंबोली, को को ढ़ाक ढ़कोली।को को तूषण तूंबण बेली, को को आक अकायो, को को कछू कमायो।ताका मूल कुमूलूं, डाल कुडालूं, ताका पात कुपातूं।ताका फल बीज कूबीजूं, तो नीरे दोष किसायो।क्यूं क्यूं भऐ भाग ऊणां, क्यूं क्यूं कर्म बिहूणां, को को चिड़ी चमेड़ी।को को उल्लू आयो, ताकै ज्ञान न ज्योति, मोक्ष न मुक्ति।यांके कर्म इसायो, तो नीरे दोष किसायों।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
सभी सबद
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 22 कौन सा है?
सबद 22 की पहली पंक्ति है: ओ३म् लो लो रे राजिंदर रायों, बाजै बाव सुवायो।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
