
कथा: हनुमान गाथा (Katha Hanuman Gatha)
हम आज पवनसुत हनुमान की कथा सुनाते हैं, पावन कथा सुनाते हैं
हनुमान जी (बजरंगबली, बालाजी) के भजन, आरती और स्तुति हिंदी में।

हम आज पवनसुत हनुमान की कथा सुनाते हैं, पावन कथा सुनाते हैं

श्री हनुमंत लाल की पूजा आराधना में संकट मोचन हनुमान अष्टक का

॥ श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स ॥ ॥ दोहा॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज

हो हो बालाजी मेरा संकट काटो ने, हो इधर उधर न डोल

जय हो जय हो तुम्हारी जी बजरंग बली लेके शिव रूप आना

एक बार गोस्वामी तुलसीदासजी को वात-व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई थी

हनुमानजी स्तुति, जय बजरंगी जय हनुमाना, रुद्र रूप जय जय बलवाना, पवनसुत

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

कल कल कल जहाँ निर्मल बहती, माँ गंगा की धार, है पावन

देखो पावन परम श्री राम के चरण, श्री राम के चरण, प्रभु

बजरंगी सरकार, द्वार तेरे आए, द्वार तेरे आए, दरश तेरा पाए, विनती

धन धन अंजनी का लाला, बजरंगबली मतवाला, राम के काज के सँवारे

मंगलवार शनिवार, बालाजी ने ध्याले तू, थोड़ो सो सिंदूर चढ़ाकर, मन का

शरण हनुमत की जो आया, उसे पल में संभाला है, सामने आई

हे राम भक्त हनुमान जी, मुझे ऐसी भक्ति दो, चरणों की सेवा

अंजनीसुत केसरी नंदन ने, श्री राम के कारज सारे है, सम्पूर्ण रामायण

म्हारी बिनती सुणो थे हनुमान, धरुँ मैं थारो ध्यान, बेगा सा आओ

दो अक्षर वाला नाम, आये बड़ा काम जी, राम राम जपो, चले

मुश्किल करे आसान जो, वो नाम तो हनुमान है, ये बल के

सालासर में जिसका, आना जाना हो गया, वो ही मेरी बाबा का,