सबद 14: मोरा उपख्यान वेदूं कण तत भेदूं
शब्दवाणी का सबद 14 "मोरा उपख्यान वेदूं कण तत भेदूं" से शुरू होता है। इसमें 16 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् मोरा उपख्यान वेदूं कण तत भेदूं, शास्त्रे पुस्तके लिखणा न जाई।मेरा शब्द खोजो, ज्यूं शब्दे शब्द समाई।हिरणा द्रोह क्यूं हिरण हतीलूं, कृष्ण चरित बिन क्यूं बाघ बिडारत गाई।सुनही सुनहा का जाया, मुरदा बघेरी बघेरा न होयबा।कृष्ण चरित विन, सींचाण कब ही न सुजीऊ।खर का शब्द न मधुरी बाणी, कृष्ण चरित बिन श्वान न कबही गहीरूं।मुंडी का जाया मुंडा न होयबा, कृष्ण चरित बिन रीछ कबही न सुचीलूं।बिल्ली की इन्द्री संतोष न होयबा, कृष्ण चरित बिन काफरा न होयबा लीलूं।मुरगी का जाया मोरा न होयबा, कृष्ण चरित बिन भाकला न होयबा चीरूं।दंत बिवाई जन्म न आई, कृष्ण चरित बिन लोहै पड़ै न काठ की सूलूं।नींबड़िये नारेल न होयबा, कृष्ण चरित बिन छिलरे न होयबा हीरूं।तूंबण नागर बेल न होयबा, कृष्ण चरित बिन बांवली न केली केलूं।गऊ का जाया खगा न होयबा, कृष्ण चरित बिन दया न पालत भीलूं।सूरी का जाया हस्ती न होयबा, कृष्ण चरित बिन ओछ कबही न पूरूं।कागण का जाया कोकला न होयबा, कृष्ण चरित बिन बुगली न जनिबा हंसूं।ज्ञानी कै हृदय प्रमोध आवत, अज्ञानी लागत डासूं।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 14 कौन सा है?
सबद 14 की पहली पंक्ति है: ओ३म् मोरा उपख्यान वेदूं कण तत भेदूं, शास्त्रे पुस्तके लिखणा न जाई।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
