सबद 35: बल बल भणत व्यासूं
शब्दवाणी का सबद 35 "बल बल भणत व्यासूं" से शुरू होता है। इसमें 3 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् बल बल भणत व्यासूं, नाना अगम न आसूं, नाना उदक उदासूं।बल बल भई निरासूं, गल में पड़ी परासूं, जां जां गुरु न चीन्हों।तइया सींच्या न मूलूं, कोई कोई बोलत थूलूं।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
सभी सबद
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 35 कौन सा है?
सबद 35 की पहली पंक्ति है: ओ३म् बल बल भणत व्यासूं, नाना अगम न आसूं, नाना उदक उदासूं।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
