॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ॥
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भजन · आरती · मंत्र

शब्दवाणी • सबद 51 / 120

सबद 51: सप्त पताले भुंय अंतर अंतर राखिलो

शब्दवाणी का सबद 51 "सप्त पताले भुंय अंतर अंतर राखिलो" से शुरू होता है। इसमें 5 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।

गुरु जम्भेश्वर भगवान की वाणी • मूल पाठ
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ओ३म् सप्त पताले भुंय अंतर अंतर राखिलो, म्हे अटला अटलूं।अलाह अलेख अडाल अजूनी शिंभू, पवन अधारी पिंड जलूं।काया भीतर माया आछै, माया भीतर दया आछै।दया भीतर छया जिहिं कै, छया भीतर बिंब फलूं।पूरक पूर पूर ले पोंण, भूख नहीं अन्न जीमत कोंण।

शब्दवाणी का पाठ

बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती

सभी सबद

शब्दवाणी: सभी सबदों की पहली पंक्ति के साथ सूची

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शब्दवाणी का सबद 51 कौन सा है?

सबद 51 की पहली पंक्ति है: ओ३म् सप्त पताले भुंय अंतर अंतर राखिलो, म्हे अटला अटलूं।

शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?

शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।