सबद 53: गुरु हीरा बिणजै
शब्दवाणी का सबद 53 "गुरु हीरा बिणजै" से शुरू होता है। इसमें 17 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् गुरु हीरा बिणजै, लेहम लेहूं, गुरु नै दोष न देणा।पवणा पाणी, जमी मेहूं, भार अठारै परबत रेहूं।सूरज जोति परै परेरै, एति गुरु के शरणै।केती पवली अरू जल बिम्बा, नवसै नदी निवासी नाला, सायर एति जरणां।कोड़ निनाणवै राजा भोगी, गुरु के आखर कारण जोगी।माया राणी राज तजीलो, गुरु भेंटीलो जोग सझीलो, पिण्डा देख न झुरणां।कर कृषाणी बेफांयत संठो, जो जो जीव पिण्डै नीसरणा।आदै पहलूं घड़ी अढ़ाई, स्वर्गे पहुंता हिरणी हिरणा।सुरां पुनां तेतीसां मेलों, जे जीवन्तां मरणों।के के जीव कुजीव, कुधात कलोतर बाणी।बादीलो हंकारीलो, वै भार घणां ले मरणो।मिनखा रै तैं सूतै सोयो, खूलै खोयो, जड़ पाहन संसार विगोयो।निरफल खोड़ भरांति भूला, आस किसी जा मरणों।वेसाही अंध पड़यो गल बंध, लियो गलबंध गुरु बरजंतै।हैलै श्याम सुन्दर के टोटै, पारस दुस्तर तरणों।निश्चै छेह पड़ेलो पालो, गोवलवास जु करणों।गोवलवास कमाय ले जिवड़ा, सो सुरगा पुर लहणा।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
सभी सबद
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 53 कौन सा है?
सबद 53 की पहली पंक्ति है: ओ३म् गुरु हीरा बिणजै, लेहम लेहूं, गुरु नै दोष न देणा।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
