27 नक्षत्र: नाम, स्वामी, देवता, राशि और नाम अक्षर
आकाश के 27 बराबर हिस्सों को नक्षत्र कहते हैं, हर एक 13°20′ का। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो वही जन्म नक्षत्र है, और उसके चरण से नाम का पहला अक्षर निकलता है।
आज का नक्षत्र (7 नवंबर 2026, शनिवार)
नई दिल्ली के अनुसार। नक्षत्र पूरे भारत में एक ही पल बदलता है।
27 नक्षत्रों की सूची: स्वामी, देवता, गण और नाम अक्षर
| नक्षत्र | राशि (चरण) | स्वामी ग्रह | देवता | प्रतीक | गण | नाड़ी | योनि | नाम अक्षर (चरण 1-4) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1. अश्विनी | मेष | केतु | अश्विनी कुमार | घोड़े का सिर | देव | आदि | अश्व | चू, चे, चो, ला |
| 2. भरणी | मेष | शुक्र | यम | योनि | मनुष्य | मध्य | गज | ली, लू, ले, लो |
| 3. कृत्तिका | मेष (1), वृषभ (2-4) | सूर्य | अग्नि | छुरा या अग्नि-शिखा | राक्षस | अंत्य | मेष (भेड़) | अ, ई, उ, ए |
| 4. रोहिणी | वृषभ | चंद्र | ब्रह्मा (प्रजापति) | रथ | मनुष्य | अंत्य | सर्प | ओ, वा, वी, वू |
| 5. मृगशिरा | वृषभ (1-2), मिथुन (3-4) | मंगल | चंद्र (सोम) | हिरण का सिर | देव | मध्य | सर्प | वे, वो, का, की |
| 6. आर्द्रा | मिथुन | राहु | रुद्र | आँसू की बूँद | मनुष्य | आदि | श्वान | कु, घ, ङ, छ |
| 7. पुनर्वसु | मिथुन (1-3), कर्क (4) | गुरु (बृहस्पति) | अदिति | तरकश | देव | आदि | मार्जार | के, को, हा, ही |
| 8. पुष्य | कर्क | शनि | बृहस्पति | गाय का थन | देव | मध्य | मेष (भेड़) | हु, हे, हो, डा |
| 9. आश्लेषा | कर्क | बुध | सर्प (नाग) | कुंडली मारे सर्प | राक्षस | अंत्य | मार्जार | डी, डू, डे, डो |
| 10. मघा | सिंह | केतु | पितर | राजसिंहासन | राक्षस | अंत्य | मूषक | मा, मी, मू, मे |
| 11. पूर्वा फाल्गुनी | सिंह | शुक्र | भग | पलंग के आगे के पाये | मनुष्य | मध्य | मूषक | मो, टा, टी, टू |
| 12. उत्तरा फाल्गुनी | सिंह (1), कन्या (2-4) | सूर्य | अर्यमा | पलंग के पीछे के पाये | मनुष्य | आदि | गौ | टे, टो, पा, पी |
| 13. हस्त | कन्या | चंद्र | सविता (सूर्य) | हाथ | देव | आदि | महिष | पू, ष, ण, ठ |
| 14. चित्रा | कन्या (1-2), तुला (3-4) | मंगल | विश्वकर्मा (त्वष्टा) | चमकता मोती | राक्षस | मध्य | व्याघ्र | पे, पो, रा, री |
| 15. स्वाति | तुला | राहु | वायु | हवा में अंकुर | देव | अंत्य | महिष | रू, रे, रो, ता |
| 16. विशाखा | तुला (1-3), वृश्चिक (4) | गुरु (बृहस्पति) | इंद्र और अग्नि | तोरण द्वार | राक्षस | अंत्य | व्याघ्र | ती, तू, ते, तो |
| 17. अनुराधा | वृश्चिक | शनि | मित्र | कमल | देव | मध्य | मृग | ना, नी, नू, ने |
| 18. ज्येष्ठा | वृश्चिक | बुध | इंद्र | कुंडल | राक्षस | आदि | मृग | नो, या, यी, यू |
| 19. मूल | धनु | केतु | निर्ऋति | जड़ों का गुच्छा | राक्षस | आदि | श्वान | ये, यो, भा, भी |
| 20. पूर्वाषाढ़ा | धनु | शुक्र | आपः (जल) | हाथ का पंखा | मनुष्य | मध्य | वानर | भू, धा, फा, ढा |
| 21. उत्तराषाढ़ा | धनु (1), मकर (2-4) | सूर्य | विश्वेदेव | हाथी दाँत | मनुष्य | अंत्य | नकुल | भे, भो, जा, जी |
| 22. श्रवण | मकर | चंद्र | विष्णु | कान | देव | अंत्य | वानर | खी, खू, खे, खो |
| 23. धनिष्ठा | मकर (1-2), कुंभ (3-4) | मंगल | अष्ट वसु | मृदंग | राक्षस | मध्य | सिंह | गा, गी, गू, गे |
| 24. शतभिषा | कुंभ | राहु | वरुण | खाली वृत्त | राक्षस | आदि | अश्व | गो, सा, सी, सू |
| 25. पूर्वा भाद्रपद | कुंभ (1-3), मीन (4) | गुरु (बृहस्पति) | अजैकपाद | दो मुख वाला व्यक्ति | मनुष्य | आदि | सिंह | से, सो, दा, दी |
| 26. उत्तरा भाद्रपद | मीन | शनि | अहिर्बुध्न्य | जल-सर्प | मनुष्य | मध्य | गौ | दू, थ, झ, ञ |
| 27. रेवती | मीन | बुध | पूषा | मछली | देव | अंत्य | गज | दे, दो, चा, ची |
राशि वाले कॉलम में कोष्ठक की संख्या बताती है कि नक्षत्र के कौन से चरण उस राशि में हैं। गण, नाड़ी और योनि का उपयोग कुंडली मिलान (गुण मिलान) में होता है।
नक्षत्र के चरण और नाम का पहला अक्षर
हर नक्षत्र 13°20′ का होता है और उसके 4 चरण (पद) होते हैं, हर चरण 3°20′ का। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र के जिस चरण में हो, उसी चरण का अक्षर नाम का पहला अक्षर माना जाता है। जैसे अश्विनी के पहले चरण में जन्म हो तो नाम "चू" से। अपना जन्म नक्षत्र और अक्षर नाम अक्षर टूल से तुरंत निकालें।
गंडमूल और पंचक के नक्षत्र
गंडमूल नक्षत्र (6): अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। इनमें जन्म होने पर परंपरा में गंडमूल शांति कराई जाती है।
पंचक: जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहता है, यानी धनिष्ठा के आखिरी दो चरण, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र में, तब पंचक लगता है। पंचक लगभग 5 दिन का होता है।
नक्षत्र और विंशोत्तरी दशा
जन्म नक्षत्र के स्वामी ग्रह से ही विंशोत्तरी महादशा शुरू होती है। स्वामियों का क्रम हर 9 नक्षत्रों पर दोहराता है: केतु (7 वर्ष) → शुक्र (20 वर्ष) → सूर्य (6 वर्ष) → चंद्र (10 वर्ष) → मंगल (7 वर्ष) → राहु (18 वर्ष) → गुरु (बृहस्पति) (16 वर्ष) → शनि (19 वर्ष) → बुध (17 वर्ष)। कुल 120 वर्ष। अपनी महादशा जन्म कुंडली में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कुल कितने नक्षत्र होते हैं?
ज्योतिष में 27 नक्षत्र माने जाते हैं, अश्विनी से रेवती तक। मुहूर्त में कभी-कभी अभिजीत को 28वाँ नक्षत्र भी गिना जाता है।
मेरा जन्म नक्षत्र कैसे पता करें?
जन्म तारीख, समय और स्थान से जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति निकाली जाती है। हमारे नाम अक्षर टूल या कुंडली टूल में यह मुफ़्त निकलता है।
गंडमूल नक्षत्र कौन से हैं?
अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती, ये 6 गंडमूल नक्षत्र हैं।
नक्षत्रों का राजा कौन सा है?
परंपरा में पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है और इसे खरीदारी व शुभ कामों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
आज कौन सा नक्षत्र है?
आज (7 नवंबर 2026, शनिवार) चित्रा नक्षत्र 8 नवंबर, सुबह 5:52 तक है (नई दिल्ली)।
