॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ॥
Jambh Bhakti (जम्भ भक्ति) logo

भजन · आरती · मंत्र

शब्दवाणी • सबद 96 / 120

सबद 96: सुण गुणवंता सुण बुधवंता

शब्दवाणी का सबद 96 "सुण गुणवंता सुण बुधवंता" से शुरू होता है। इसमें 5 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।

गुरु जम्भेश्वर भगवान की वाणी • मूल पाठ
शेयर करें:WhatsAppFacebookTelegram

ओ३म् सुण गुणवंता सुण बुधवंता, मेरी उत्पति आदि लुहारूं।भाठी अन्दर लोह तपीलो, तंतक सोनों घड़ै कसारूं।मेरी मनसा अहरण नाद हथोड़ो, शशीयर सूर तपीलों, पवन अधारी खालूं।जे थे गुरु का शब्द मानीलो, लंघिबा भव जल पारूं।आसण छेड़ी सुखासण बैठो, जुग जुग जीवै जम्भ लुहारूं।

शब्दवाणी का पाठ

बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती

सभी सबद

शब्दवाणी: सभी सबदों की पहली पंक्ति के साथ सूची

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शब्दवाणी का सबद 96 कौन सा है?

सबद 96 की पहली पंक्ति है: ओ३म् सुण गुणवंता सुण बुधवंता, मेरी उत्पति आदि लुहारूं।

शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?

शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।