सबद 117: टूका पाया मगर मचाया
शब्दवाणी का सबद 117 "टूका पाया मगर मचाया" से शुरू होता है। इसमें 3 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् टूका पाया मगर मचाया, ज्यूं हंडियाया कुता।जोग जुगत की सार न जांणी, मूंड मुंडाय बिगूता।चेला गुरु अपरचै खीणां, मरते मोक्ष न पायो।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
सभी सबद
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 117 कौन सा है?
सबद 117 की पहली पंक्ति है: ओ३म् टूका पाया मगर मचाया, ज्यूं हंडियाया कुता।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
