
सकट चौथ पौराणिक व्रत कथा – श्री महादेवजी पार्वती (Sakat Chauth Pauranik Vrat Katha – Shri Mahadev Parvati)
एक बार महादेवजी पार्वती सहित नर्मदा के तट पर गए। वहाँ एक
भगवान शिव (भोलेनाथ, महादेव) के भजन, आरती, स्तुति, मंत्र और कथाएँ हिंदी लिरिक्स के साथ।

एक बार महादेवजी पार्वती सहित नर्मदा के तट पर गए। वहाँ एक

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग का वर्णन शिवपुराण में मिलता है। शिवपुराण में कहा गया

एक बार शरद पूर्णिमा की शरत-उज्ज्वल चाँदनी में वंशीवट यमुना के किनारे

महाशिवरात्रि पूजन व्रत कथा के से जुड़ी एक रोचक पौराणिक कथा… एक

ॐ हौं जूं स: ॐ भू र्भुव: स्व:। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिम

भगवान शिव का ध्यान करने मात्र से मन में जो एक छवि

भगवान शिव की पूजा के लिए शिवलिंग की पूजा करने का प्रावधान

॥ श्रीकाशीविश्वनाथाष्टकम् ॥ गङ्गातरंगरमणीयजटाकलापं गौरीनिरन्तरविभूषितवामभागम् । नारायणप्रियमनंगमदापहारं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥1॥ वाचामगोचरमनेकगुणस्वरूपं

सत सृष्टि तांडव रचयिता नटराज राज नमो नमः । हे आद्य गुरु

॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥ नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै

सार्थशिवताण्डवस्तोत्रम् ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् । डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार

भवाय चन्द्रचूडाय निर्गुणाय गुणात्मने । कालकालाय रुद्राय नीलग्रीवाय मङ्गलम् ॥ १ ॥

जय शिवशंकर, जय गंगाधर, करुणाकर करतार हरे, जय कैलाशी, जय अविनाशी, सुखराशी

॥ श्रीरुद्राष्टकम् ॥ नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं

ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं, वन्दे जगत्कारणम् । वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं, वन्दे

ॐ शिवाय नमः ॥ ॐ महेश्वराय नमः ॥ ॐ शंभवे नमः ॥

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥ ईशगिरीश नरेश परेश महेश

ॐ स्थिराय नमः। ॐ स्थाणवे नमः। ॐ प्रभवे नमः। ॐ भीमाय नमः।

पशूनां पतिं पापनाशं परेशं, गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम् । जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं, महादेवमेकं

रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं नानारत्नविभूषितं मृगमदामोदाङ्कितं चन्दनम् । जातीचम्पकबिल्वपत्ररचितं पुष्पं