॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ॥
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FAQ • 236+ सवाल • 9 विषय

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

जम्भ भक्ति से जुड़े सभी सवाल एक जगह: एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, पंचांग, राहु काल, शुभ मुहूर्त, बिश्नोई धर्म, राशि, कुंडली और लोकदेवता। सवाल पर क्लिक करें, जवाब वहीं खुलेगा। हर जवाब के साथ पूरा पेज भी है।

अपडेट: 8 नवंबर 2026 • तारीख वाले जवाब: रोज़ अपने आप अपडेट
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236 सवाल, 9 विषय

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अपडेटआज कौन सी तिथि है?

आज 8 नवंबर 2026, रविवार को सूर्योदय के समय कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि है, जो सुबह 11:29 तक रहेगी (नई दिल्ली)। आज की तिथि →

अपडेटअगली एकादशी कब है?

अगली एकादशी देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी है। स्मार्त (गृहस्थ) व्रत 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को और वैष्णव व्रत 21 नवंबर 2026, शनिवार को है। पारण 21 नवंबर, शनिवार, दोपहर 1:10 से दोपहर 3:18 तक। पूरी जानकारी →

अपडेटअगली अमावस्या कब है?

अगली अमावस्या कार्तिक अमावस्या है। अमावस्या 8 नवंबर, रविवार, सुबह 11:29 से 9 नवंबर, सोमवार, दोपहर 12:32 तक रहेगी, उदया तिथि से 9 नवंबर 2026, सोमवार को। बिश्नोई परंपरा में व्रत अमावस्या लगने से उतरने तक रखा जाता है। अमावस्या कब है →

अपडेटअगली पूर्णिमा कब है?

अगली पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा है। व्रत 24 नवंबर 2026, मंगलवार को है, स्नान-दान भी इसी दिन। पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर, सोमवार, रात 11:43 से 24 नवंबर, मंगलवार, रात 8:24 तक। पूरी जानकारी →

जम्भ भक्ति के बारे में8 सवाल

वेबसाइट, ऐप और जानकारी जुड़वाने से जुड़े सवाल।

जम्भ भक्ति पर क्या मिलता है?

शिव, कृष्ण, राम, हनुमान, गणेश, माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी, खाटू श्याम और सभी देवी-देवताओं के भजन, आरती, मंत्र, चालीसा और व्रत कथाएँ हिंदी में। साथ में रोज़ का पंचांग, बिश्नोई कैलेंडर, व्रत-त्योहार की तारीखें और आसान ज्योतिष टूल।

क्या जम्भ भक्ति पर सब कुछ मुफ़्त है?

हाँ। भजन, आरती, चालीसा, पंचांग, कुंडली, कुंडली मिलान और जन्म रिपोर्ट सब मुफ़्त हैं। न रजिस्ट्रेशन, न मोबाइल नंबर। वेबसाइट का खर्च Google के विज्ञापनों से चलता है।

जम्भ भक्ति की शुरुआत किसने और कब की?

जम्भ भक्ति की शुरुआत 2020 में संदीप बिश्नोई ने बिश्नोई भजनों और जाम्भोजी की कथाओं से की थी। बाद में सभी हिंदू देवी-देवताओं के भजन और फिर पंचांग व ज्योतिष टूल जोड़े गए। हमारी कहानी →

किसी देवी-देवता के सभी भजन एक साथ कैसे देखें?

होम पेज के “देवी-देवता” हिस्से में अपने आराध्य को चुनें, जैसे भगवान शिव या श्री कृष्ण। उस पेज पर उनके सभी भजन, आरती और मंत्र एक साथ मिलेंगे।

आज की तिथि कहाँ देखें?

आज की तिथि पेज पर आज की तिथि, पक्ष, माह, विक्रम संवत और व्रत-त्योहार रोज़ अपडेट होते हैं। अपने शहर का पूरा पंचांग आज का पंचांग में देखें।

क्या जम्भ भक्ति का मोबाइल ऐप है?

हाँ, भजन, आरती और साखी के लिए जम्भ भक्ति का Android ऐप Google Play Store पर है। ऐप डाउनलोड करें →

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बिश्नोई धर्म और गुरु जम्भेश्वर22 सवाल

जाम्भोजी, शब्दवाणी, बिश्नोई अमावस्या और धामों के मेले।

बिश्नोई समाज के आराध्य कौन हैं?

गुरु जम्भेश्वर भगवान (जाम्भोजी), जिन्होंने 29 नियम दिए। उनका समाधि स्थल मुकाम और तपोभूमि समराथल धोरा बीकानेर ज़िले में है। पूरा पढ़ें →

शब्दवाणी में कितने सबद हैं?

शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। पूरा पढ़ें →

शब्दवाणी का पहला सबद कौन सा है?

पहला सबद “ओ३म् गुरु चीन्हों गुरु चीन्ह् पुरोहित, गुरु मुख धर्म बखाणी” है। पूरा सबद 1 पढ़ें। पूरा पढ़ें →

शब्दवाणी किस भाषा में है?

शब्दवाणी मरुभाषा यानी पुरानी राजस्थानी (मारवाड़ी) में है, जिसमें संस्कृत, हिंदी और कुछ फ़ारसी शब्द भी मिलते हैं। पूरा पढ़ें →

शब्दवाणी का पाठ कब किया जाता है?

बिश्नोई समाज में हवन, अमावस्या के व्रत, पाहल और जागरण के समय शब्दवाणी का पाठ किया जाता है। पूरा पढ़ें →

बिश्नोई पंथ की स्थापना कब हुई?

वि.सं. 1542 (सन 1485) की कार्तिक वदी अष्टमी को समराथल धोरे पर। पूरा पढ़ें →

बिश्नोई नाम कैसे पड़ा?

जाम्भोजी के बताए 29 (बीस और नौ) नियमों को मानने वाले बिश्नोई कहलाए। पूरा पढ़ें →

जाम्भोजी का निर्वाण कब हुआ?

वि.सं. 1593 (सन 1536) की मिगसर (मार्गशीर्ष) वदी नवमी को। पूरा पढ़ें →

चिलत नवमी क्या है?

जाम्भोजी के निर्वाण की तिथि, मिगसर वदी नवमी, को चिलत नवमी कहते हैं। पूरा पढ़ें →

जाम्भोजी का जन्म कब और कहाँ हुआ?

वि.सं. 1508 (सन 1451) की भादो वदी अष्टमी को नागौर ज़िले के पीपासर गाँव में। पूरा पढ़ें →

जाम्भोजी के माता-पिता कौन थे?

पिता लोहट जी पंवार और माता हांसा देवी। पूरा पढ़ें →

खेजड़ली मेला कब लगता है?

हर साल भादो (भाद्रपद) सुदी दशमी को। पूरा पढ़ें →

खेजड़ली में कितने लोग शहीद हुए थे?

सन 1730 में अमृता देवी समेत 363 बिश्नोई खेजड़ी के पेड़ बचाते हुए शहीद हुए। पूरा पढ़ें →

राष्ट्रीय वन शहीद दिवस कब है?

हर साल 11 सितंबर को, खेजड़ली के बलिदान की याद में। पूरा पढ़ें →

जाम्भोलाव मेला कब लगता है?

बड़ा मेला चैत्र अमावस्या को और छोटा मेला भादो सुदी पूर्णिमा को। पूरा पढ़ें →

जाम्भोलाव धाम कहाँ है?

राजस्थान के फलोदी क्षेत्र के जांभा गाँव में। पूरा पढ़ें →

मुकाम मेला साल में कितनी बार लगता है?

साल में दो बार: फाल्गुन अमावस्या और आसोज (आश्विन) अमावस्या को। पूरा पढ़ें →

मुकाम कहाँ है?

मुकाम राजस्थान के बीकानेर ज़िले की नोखा तहसील में है। यहाँ गुरु जम्भेश्वर भगवान की समाधि (मुक्तिधाम) है। पूरा पढ़ें →

मुकाम मेले में क्या होता है?

समाधि के दर्शन, हवन, जागरण, शब्दवाणी का पाठ और समराथल धोरे की यात्रा। बिश्नोई समाज के लोग देश भर से आते हैं। पूरा पढ़ें →

बिश्नोई अमावस्या का व्रत कब से कब तक रखें?

बिश्नोई परंपरा में अमावस्या का व्रत अमावस्या लगने के समय से शुरू करते हैं और अमावस्या उतरने के समय खोलते हैं। जैसे, अमावस्या सुबह 10:21 पर लगे तो व्रत 10:21 से शुरू होगा और उतरने के समय पूरा होगा। पेज की तालिका में हर अमावस्या के लगने और उतरने का समय दिया गया है। पूरा पढ़ें →

अमावस्या पर बिश्नोई समाज में क्या करते हैं?

अमावस्या का व्रत जाम्भोजी के बताए 29 नियमों में से एक है। इस दिन व्रत के साथ हवन, शब्दवाणी का पाठ और जागरण किया जाता है, और बड़े धामों पर मेले लगते हैं। पूरा पढ़ें →

बिश्नोई समाज अमावस्या का व्रत क्यों रखता है?

गुरु जम्भेश्वर भगवान के 29 नियमों में अमावस्या का व्रत रखना शामिल है। इस दिन व्रत, हवन और जम्भवाणी के पाठ से मन शुद्ध रखने की परंपरा है। पूरा पढ़ें →

एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या32 सवाल

व्रत के नियम, पारण, स्नान-दान और हर व्रत का महत्व।

एक साल में कितनी एकादशी होती हैं?

साल में 24 एकादशी होती हैं, हर महीने दो (शुक्ल और कृष्ण पक्ष)। अधिक मास वाले साल में 26 हो जाती हैं। पूरा पढ़ें →

एकादशी पर क्या नहीं खाना चाहिए?

एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा लिया जा सकता है। पूरा पढ़ें →

पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान अलग दिन क्यों होते हैं?

व्रत चंद्रोदय या दोपहर के समय की पूर्णिमा से और स्नान-दान सूर्योदय के समय की पूर्णिमा से तय होता है। पूर्णिमा तिथि दो दिनों में बँटी हो तो ये अलग-अलग दिन पड़ते हैं। पूरा पढ़ें →

पूर्णिमा पर क्या करें?

सत्यनारायण कथा, चंद्रमा को अर्घ्य, पवित्र नदी में स्नान और दान की परंपरा है। पूरा पढ़ें →

अमावस्या का व्रत किस दिन रखें?

आमतौर पर उदया तिथि वाले दिन, यानी जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या हो। अगर अमावस्या दो दिन में बँटी हो तो अपने पंडित या परिवार की परंपरा मानें। पूरा पढ़ें →

अमावस्या पर क्या दान करें?

परंपरा में अमावस्या पर अन्न, वस्त्र, तिल और ज़रूरतमंदों को भोजन का दान शुभ माना जाता है। पूरा पढ़ें →

स्मार्त और वैष्णव एकादशी अलग-अलग दिन क्यों होती है?

स्मार्त परंपरा में आमतौर पर वह दिन लिया जाता है जिस दिन सूर्योदय पर एकादशी हो। वैष्णव परंपरा में अगर अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले) में दशमी हो, तो उस दिन को दशमी से मिला हुआ मानकर व्रत अगले दिन रखा जाता है। पूरा पढ़ें →

एकादशी का पारण किस समय करना चाहिए?

पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में, हरि वासर खत्म होने के बाद किया जाता है। सबसे अच्छा समय सूर्योदय के बाद का प्रातःकाल है। हर एकादशी का पारण समय इस लिस्ट में दिया है। पूरा पढ़ें →

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

परंपरा के अनुसार एकादशी पर अन्न, खासकर चावल नहीं खाया जाता। मान्यता है कि इस दिन अन्न छोड़कर मन को भगवान विष्णु की भक्ति में लगाना चाहिए। पूरा पढ़ें →

क्या बुजुर्ग या बीमार लोग एकादशी व्रत रख सकते हैं?

हाँ, अपनी शक्ति के अनुसार फलाहार करके व्रत रखा जा सकता है। जो लोग रोज़ दवा लेते हैं, वे निर्जल व्रत डॉक्टर की सलाह से ही रखें। पूरा पढ़ें →

पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य कब दें?

व्रत वाले दिन शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल, दूध और अक्षत से अर्घ्य दिया जाता है। हर पूर्णिमा के व्रत वाले दिन का चंद्रोदय समय लिस्ट में दिया है। पूरा पढ़ें →

पूर्णिमा पर क्या दान करें?

पूर्णिमा पर अपनी शक्ति के अनुसार अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल या धन का दान किया जाता है। जरूरतमंद को भोजन कराना भी अच्छा माना जाता है। पूरा पढ़ें →

अमावस्या दो दिन हो तो व्रत किस दिन रखें?

स्नान, दान और व्रत उस दिन होता है जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि हो। पितरों का श्राद्ध उस दिन होता है जिस दिन दोपहर बाद अमावस्या हो, और दीपावली की पूजा उस शाम होती है जब प्रदोष काल में अमावस्या हो। पूरा पढ़ें →

मार्गशीर्ष पूर्णिमा को और क्या कहते हैं?

इसे अगहन पूर्णिमा भी कहते हैं। इसी दिन भगवान दत्तात्रेय की जयंती और कई जगह अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। पूरा पढ़ें →

भगवान दत्तात्रेय कौन हैं?

भगवान दत्तात्रेय महर्षि अत्रि और सती अनसूया के पुत्र हैं। उन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश, तीनों का संयुक्त रूप माना जाता है और वे आदि गुरु के रूप में पूजे जाते हैं। पूरा पढ़ें →

मार्गशीर्ष महीना इतना पवित्र क्यों माना जाता है?

भगवद् गीता (अध्याय 10, श्लोक 35) में भगवान कृष्ण कहते हैं कि महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ। इसलिए इस महीने में स्नान, दान, जप और कृष्ण भक्ति का विशेष महत्व है। पूरा पढ़ें →

मोक्षदा एकादशी को मोक्षदा क्यों कहते हैं?

मोक्षदा का अर्थ है मोक्ष देने वाली। कथा के अनुसार राजा वैखानस ने यह व्रत करके उसका पुण्य अपने पिता को अर्पित किया और उनके पिता नरक के कष्ट से छूट गए। पूरा पढ़ें →

गीता जयंती पर क्या करें?

भगवान कृष्ण की पूजा करें, गीता का पाठ करें (पूरा न हो सके तो कम से कम एक अध्याय), गीता की आरती गाएँ और किसी को गीता की प्रति भेंट करें। पूरा पढ़ें →

क्या वैकुंठ एकादशी और मोक्षदा एकादशी एक ही हैं?

हमेशा नहीं। दक्षिण भारत में धनु मास (जब सूर्य धनु राशि में होता है) की शुक्ल एकादशी को वैकुंठ एकादशी कहते हैं। किसी साल यह मोक्षदा एकादशी के दिन पड़ती है और किसी साल अगली, यानी पौष पुत्रदा एकादशी के दिन। पूरा पढ़ें →

भगवद् गीता में कितने अध्याय और श्लोक हैं?

गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। यह महाभारत के भीष्म पर्व का हिस्सा है। पूरा पढ़ें →

क्या मोक्षदा एकादशी पर चावल खा सकते हैं?

नहीं, एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फलाहार में फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा ले सकते हैं। पूरा पढ़ें →

उत्पन्ना एकादशी का क्या महत्व है?

मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के शरीर से देवी एकादशी प्रकट हुई थीं और उन्होंने मुर नाम के दैत्य का अंत किया था। इसलिए इसे एकादशी व्रत का जन्मदिन माना जाता है। पूरा पढ़ें →

उत्पन्ना एकादशी किस महीने में आती है?

उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में यह मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पक्ष की एकादशी है। गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अमांत पंचांग में यही दिन कार्तिक कृष्ण एकादशी कहलाता है। अंग्रेज़ी कैलेंडर में यह नवंबर या दिसंबर में आती है। पूरा पढ़ें →

उत्पन्ना एकादशी पर किसकी पूजा की जाती है?

भगवान विष्णु और देवी एकादशी की। पूजा में तुलसी दल, पीले फूल, फल और धूप-दीप चढ़ाए जाते हैं। पूरा पढ़ें →

क्या उत्पन्ना एकादशी पर चावल खा सकते हैं?

नहीं, एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फलाहार में फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा ले सकते हैं। पूरा पढ़ें →

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का अंत किया था। इसी से वे त्रिपुरारी कहलाए और यह दिन त्रिपुरारी पूर्णिमा। पूरा पढ़ें →

कार्तिक स्नान कब खत्म होता है?

शरद पूर्णिमा से शुरू होने वाला कार्तिक मास का स्नान कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के साथ पूरा होता है। इसी दिन भीष्म पंचक भी पूरा होता है। पूरा पढ़ें →

कार्तिक पूर्णिमा पर क्या दान करें?

दीपदान इस दिन का सबसे खास दान है। इसके अलावा अन्न, गुड़, तिल, गर्म कपड़े या कंबल और ज़रूरतमंदों को भोजन देना शुभ माना जाता है। पूरा पढ़ें →

देवउठनी एकादशी को और किन नामों से जाना जाता है?

प्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, हरि प्रबोधिनी एकादशी और राजस्थान-मध्य प्रदेश में देव उठनी ग्यारस। पूरा पढ़ें →

देवउठनी एकादशी की पूजा किस समय करें?

सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और शाम को सूर्यास्त (शाम 5:25) के बाद प्रदोष काल में देव उठाने की पूजा करें। पूरा पढ़ें →

क्या देवउठनी एकादशी पर चावल खा सकते हैं?

नहीं, एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फलाहार में फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा ले सकते हैं। पूरा पढ़ें →

देवउठनी एकादशी के बाद शादी के मुहूर्त कब से हैं?

देवउठनी एकादशी से विवाह जैसे शुभ काम फिर शुरू होते हैं और राजस्थान में इसे अबूझ सावा माना जाता है। अपनी शादी की तारीख पंडित से कुंडली और मुहूर्त देखकर ही तय करें। पूरा पढ़ें →

व्रत, त्योहार और कैलेंडर28 सवाल

संक्रांति, प्रदोष, शिवरात्रि, संकष्टी, भद्रा, पंचक और ग्रहण।

साल में कितनी संक्रांति होती हैं?

सूर्य हर महीने एक राशि बदलता है, इसलिए साल में 12 संक्रांति होती हैं। इनमें मकर संक्रांति सबसे बड़ी मानी जाती है। पूरा पढ़ें →

मकर संक्रांति कभी 14 और कभी 15 जनवरी को क्यों होती है?

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश हर साल लगभग 6 घंटे आगे खिसकता है। अगर प्रवेश सूर्यास्त के बाद हो, तो पर्व अगले दिन मनाया जाता है। इसलिए तारीख 14 या 15 जनवरी हो जाती है। पूरा पढ़ें →

खरमास में क्या नहीं करना चाहिए?

परंपरा में खरमास में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और नया व्यापार शुरू करने जैसे शुभ काम नहीं किए जाते। पूजा-पाठ, दान और तीर्थ यात्रा की जा सकती है। पूरा पढ़ें →

संक्रांति पर क्या दान करें?

संक्रांति पर स्नान के बाद तिल, गुड़, अन्न, कंबल और वस्त्र का दान किया जाता है। मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ का खास महत्व है। पूरा पढ़ें →

भद्रा में क्या नहीं करना चाहिए?

परंपरा में भद्रा के समय विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार, राखी बाँधना और होलिका दहन जैसे शुभ काम नहीं किए जाते। पूरा पढ़ें →

रक्षाबंधन में भद्रा का क्या महत्व है?

रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को होता है और पूर्णिमा के पहले आधे हिस्से में भद्रा रहती है। इसलिए राखी भद्रा खत्म होने के बाद ही बाँधी जाती है। पूरा पढ़ें →

भद्रा कितने घंटे की होती है?

भद्रा तिथि की आधी लंबाई की होती है, इसलिए यह आमतौर पर 10 से 14 घंटे तक रहती है। पूरा पढ़ें →

भद्रा का समय पूरे भारत में एक ही होता है?

हाँ, भद्रा का समय सूर्य और चंद्रमा की दूरी से तय होता है, इसलिए यह पूरे भारत में एक ही समय पर शुरू और खत्म होती है। पूरा पढ़ें →

भद्रा का वास क्या होता है?

परंपरा में चंद्रमा की राशि के हिसाब से माना जाता है कि भद्रा स्वर्ग, पाताल या पृथ्वी पर है। पृथ्वी पर वास वाली भद्रा को सबसे ज़्यादा टाला जाता है। पूरा पढ़ें →

पंचक क्या होता है?

जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के आखिरी आधे से रेवती नक्षत्र तक, यानी कुंभ और मीन राशि में रहता है, उस लगभग 5 दिन के समय को पंचक कहते हैं। पूरा पढ़ें →

पंचक कितने दिन का होता है?

चंद्रमा को कुंभ और मीन राशि पार करने में लगभग 4.5 से 5 दिन लगते हैं, इसलिए पंचक भी लगभग इतने ही दिन का होता है। पूरा पढ़ें →

मृत्यु पंचक क्या है?

शनिवार से शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहते हैं। परंपरा में इसे सबसे ज़्यादा सावधानी वाला माना जाता है। पूरा पढ़ें →

क्या पंचक में शुभ काम कर सकते हैं?

पंचक में सगाई, विवाह जैसे काम आमतौर पर टाले जाते हैं, लेकिन रोज़ के काम, पूजा-पाठ और नौकरी-व्यापार सामान्य रूप से चलते रहते हैं। पूरा पढ़ें →

पंचक का समय कैसे निकाला जाता है?

चंद्रमा के कुंभ राशि (300 अंश) में प्रवेश से मीन राशि (360 अंश) पार करने तक का समय पंचक है। यह समय पूरे भारत में एक ही होता है। पूरा पढ़ें →

मासिक शिवरात्रि किस दिन रखी जाती है?

मासिक शिवरात्रि उस दिन रखी जाती है जिस रात निशीथ काल यानी आधी रात के समय कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि हो। पूरा पढ़ें →

शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?

हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी मासिक शिवरात्रि है। फाल्गुन महीने (पूर्णिमांत) की कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहते हैं, जो साल की सबसे बड़ी शिवरात्रि है। पूरा पढ़ें →

शिवरात्रि और प्रदोष में क्या अंतर है?

प्रदोष व्रत त्रयोदशी को शाम के समय होता है, जबकि शिवरात्रि चतुर्दशी को आधी रात की पूजा से जुड़ी है। प्रदोष की तारीखें प्रदोष व्रत लिस्ट में देखें। पूरा पढ़ें →

शिवरात्रि पर क्या चढ़ाएँ?

शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल चढ़ाए जाते हैं। पूरा पढ़ें →

संकष्टी चतुर्थी किस दिन रखी जाती है?

संकष्टी चतुर्थी उस दिन रखी जाती है जिस दिन चंद्रोदय के समय कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि हो, क्योंकि व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही खोला जाता है। पूरा पढ़ें →

संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय कब होता है?

संकष्टी पर चंद्रोदय आमतौर पर रात 8 से 10 बजे के बीच होता है। हर संकष्टी का नई दिल्ली का चंद्रोदय समय लिस्ट में दिया है। आपके शहर में यह कुछ मिनट आगे-पीछे होगा। पूरा पढ़ें →

संकष्टी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?

संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है, जबकि विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को होती है। दोनों भगवान गणेश को समर्पित हैं। पूरा पढ़ें →

संकष्टी चतुर्थी में क्या खाएँ?

दिन में फल, दूध, साबूदाना या मूंगफली जैसी फलाहारी चीज़ें ली जा सकती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। पूरा पढ़ें →

उपछाया चंद्र ग्रहण क्या है?

जब चंद्रमा पृथ्वी की हल्की बाहरी छाया (उपछाया) से गुज़रता है, तो उसकी चमक थोड़ी कम हो जाती है, पर वह कटा हुआ नहीं दिखता। इसे उपछाया ग्रहण कहते हैं और इसका सूतक नहीं माना जाता। पूरा पढ़ें →

सूर्य ग्रहण को कैसे देखें?

सूर्य ग्रहण को कभी भी खुली आँखों से न देखें। सिर्फ प्रमाणित सोलर फ़िल्टर वाले चश्मे या पिनहोल प्रोजेक्शन का इस्तेमाल करें। पूरा पढ़ें →

त्योहारों की तारीख अलग-अलग कैलेंडर में अलग क्यों होती है?

तिथि दिन के किसी भी समय शुरू हो सकती है और हर त्योहार का अपना नियम (उदया, मध्याह्न, प्रदोष, निशीथ) होता है। शहर और परंपरा (स्मार्त या वैष्णव) अलग होने से भी कभी-कभी एक दिन का फर्क आ जाता है। पूरा पढ़ें →

प्रदोष काल कितने बजे से कितने बजे तक होता है?

प्रदोष काल सूर्यास्त से शुरू होकर लगभग ढाई घंटे तक रहता है। सर्दियों में यह शाम लगभग 5:30 से और गर्मियों में शाम लगभग 7:00 से शुरू होता है। हर प्रदोष का सही समय लिस्ट में दिया है। पूरा पढ़ें →

प्रदोष व्रत किस भगवान का होता है?

प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इसकी पूजा शाम के प्रदोष काल में की जाती है। पूरा पढ़ें →

प्रदोष व्रत में क्या खाएँ?

प्रदोष व्रत में दिन भर फल, दूध और फलाहार लिया जा सकता है। कई लोग पूजा के बाद शाम को एक समय सात्विक भोजन करते हैं। पूरा पढ़ें →

पंचांग, तिथि, राहु काल और चौघड़िया38 सवाल

पंचांग के अंग, तिथि की गणना और हर शहर का समय।

पंचांग के 5 अंग कौन से हैं?

पंचांग के 5 अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। “पंचांग” शब्द का अर्थ ही पाँच अंग है। पूरा पढ़ें →

तिथि कैसे बनती है?

चंद्रमा जब सूर्य से हर 12 अंश आगे निकलता है, तब एक तिथि पूरी होती है। 30 तिथियों का एक चांद्र मास होता है। पूरा पढ़ें →

कुल कितने योग और करण होते हैं?

कुल 27 योग और 11 करण होते हैं। हर तिथि में दो करण आते हैं। पूरा पढ़ें →

भद्रा क्या है?

विष्टि करण को भद्रा कहते हैं। भद्रा के समय में शुभ काम, जैसे गृह प्रवेश या नया काम, शुरू नहीं किए जाते। पूरा पढ़ें →

हिंदू पंचांग में दिन कब से शुरू होता है?

हिंदू पंचांग में दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक गिना जाता है, आधी रात से नहीं। पूरा पढ़ें →

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

तिथि, नक्षत्र और योग पूरे भारत में एक ही पल में बदलते हैं, लेकिन सूर्योदय और सूर्यास्त हर शहर में अलग होते हैं। राहु काल, चौघड़िया, अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय-सूर्यास्त से निकलते हैं, इसलिए ये हर शहर में अलग आते हैं। पूरा पढ़ें →

पूर्व और पश्चिम के शहरों में कितना अंतर आता है?

देशांतर के हर एक अंश पर सूर्योदय लगभग 4 मिनट बदलता है। इसलिए कोलकाता और जैसलमेर के सूर्योदय में लगभग एक घंटे तक का अंतर हो सकता है। पूरा पढ़ें →

मेरा गांव सूची में नहीं है तो क्या करें?

अपने सबसे पास का कस्बा या शहर चुनें। 20 से 30 किलोमीटर की दूरी में समय का अंतर आमतौर पर एक-दो मिनट ही रहता है। पूरा पढ़ें →

क्या पुरानी या आगे की तारीख का पंचांग देख सकते हैं?

हाँ। हर शहर के पंचांग पेज पर तारीख चुनकर 2026 से 2036 तक किसी भी दिन का पंचांग, राहु काल और चौघड़िया देखा जा सकता है। पूरा पढ़ें →

यह पंचांग कैसे बनता है?

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति खगोलीय गणित (एफ़ेमेरिस) से निकाली जाती है और लाहिड़ी अयनांश लिया जाता है। हर शहर का सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त उसके अक्षांश-देशांतर से अलग निकाला जाता है। समय को प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँचा गया है। पूरा पढ़ें →

शहरों की सूची कहाँ से ली गई है?

शहरों के नाम और निर्देशांक GeoNames (CC BY 4.0) से लिए गए हैं। बड़े शहरों के हिंदी नाम जम्भ भक्ति ने खुद जाँचकर लिखे हैं। पूरा पढ़ें →

क्या विदेश के शहरों का पंचांग भी मिलेगा?

अभी भारत के शहर हैं। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रहने वाले हिंदुओं के लिए वहाँ के शहरों का पंचांग जल्द जोड़ा जाएगा। पूरा पढ़ें →

कौन सा समय सही मानें, सुबह का या दोपहर का?

पंचांग में दिया हर समय भारतीय मानक समय (IST) में है। व्रत और पूजा में अपने शहर का सूर्योदय और तिथि का समय साथ देखकर फैसला करें। पूरा पढ़ें →

चौघड़िया कितने प्रकार के होते हैं?

चौघड़िया 7 प्रकार के होते हैं: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल और रोग। इनमें अमृत, शुभ, लाभ और चर शुभ माने जाते हैं। पूरा पढ़ें →

सबसे अच्छा चौघड़िया कौन सा है?

अमृत चौघड़िया सबसे शुभ माना जाता है। शुभ और लाभ भी अच्छे हैं, और चर यात्रा के लिए अच्छा माना जाता है। पूरा पढ़ें →

चौघड़िया कितनी देर का होता है?

दिन और रात दोनों को 8-8 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है। इसलिए एक चौघड़िया लगभग डेढ़ घंटे का होता है, जो मौसम के साथ थोड़ा घटता-बढ़ता है। पूरा पढ़ें →

दिन का पहला चौघड़िया कैसे तय होता है?

दिन का पहला चौघड़िया उस वार के ग्रह से तय होता है। जैसे रविवार को उद्वेग, सोमवार को अमृत, मंगलवार को रोग, बुधवार को लाभ, गुरुवार को शुभ, शुक्रवार को चर और शनिवार को काल से दिन शुरू होता है। पूरा पढ़ें →

चौघड़िया और राहु काल में क्या अंतर है?

चौघड़िया पूरे दिन और रात को शुभ-अशुभ हिस्सों में बाँटता है, जबकि राहु काल दिन का सिर्फ एक अशुभ हिस्सा है। कई लोग शुभ चौघड़िया चुनते समय राहु काल से भी बचते हैं। पूरा पढ़ें →

क्या चौघड़िया गुजरात और राजस्थान में ज़्यादा देखा जाता है?

हाँ, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में खरीदारी, यात्रा और नए काम के लिए चौघड़िया देखने की परंपरा ज़्यादा है। पूरा पढ़ें →

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को 8 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है। वार के अनुसार इनमें से एक हिस्सा राहु काल होता है, जैसे सोमवार को दूसरा और रविवार को आठवाँ। पूरा पढ़ें →

राहु काल कितनी देर का होता है?

राहु काल दिन की लंबाई का आठवाँ हिस्सा होता है, यानी लगभग डेढ़ घंटा। सर्दियों में यह थोड़ा छोटा और गर्मियों में थोड़ा लंबा होता है। पूरा पढ़ें →

राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?

परंपरा में राहु काल में नया काम, नई खरीदारी, यात्रा की शुरुआत या शुभ संस्कार शुरू नहीं किए जाते। पहले से चल रहे काम जारी रखे जा सकते हैं। पूरा पढ़ें →

क्या रात में भी राहु काल होता है?

आम तौर पर पंचांग में राहु काल दिन के समय का ही बताया जाता है, यानी सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच। पूरा पढ़ें →

यमगंड और गुलिक काल क्या हैं?

राहु काल की तरह यमगंड और गुलिक काल भी दिन के 8 हिस्सों में से एक-एक हिस्सा हैं। यमगंड को अशुभ और गुलिक काल को भी नए काम के लिए टालने योग्य माना जाता है। पूरा पढ़ें →

राहु काल रविवार को कब होता है?

रविवार को दिन का आठवाँ यानी आखिरी हिस्सा राहु काल होता है। अगर सूर्योदय 6 बजे और सूर्यास्त 6 बजे हो, तो यह शाम 4:30 से 6:00 तक रहेगा। पूरा पढ़ें →

योग कितने होते हैं?

योग भी 27 होते हैं। सूर्य और चंद्रमा के स्थान को जोड़कर 13 अंश 20 कला के हिस्सों में बाँटा जाता है, उसी से योग निकलता है। पूरा पढ़ें →

करण क्या होता है?

करण तिथि का आधा हिस्सा है, इसलिए हर तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं, जिनमें 7 बार-बार आते हैं और 4 महीने में एक बार। विष्टि करण को भद्रा भी कहते हैं। पूरा पढ़ें →

चंद्र राशि क्या होती है?

चंद्रमा जिस राशि में होता है, उसे चंद्र राशि कहते हैं। चंद्रमा लगभग सवा दो दिन में राशि बदलता है। पूरा पढ़ें →

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है, जिसमें हर दिन की तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण दिए होते हैं। इन्हीं से व्रत-त्योहार और शुभ समय तय होते हैं। पूरा पढ़ें →

जम्भ भक्ति का पंचांग किस शहर का है?

यहाँ नई दिल्ली, बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, नोखा, मुकाम समेत भारत के 7,000 से ज़्यादा शहरों और कस्बों का पंचांग है। हर शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से राहु काल, चौघड़िया और मुहूर्त अलग से निकाले गए हैं। पूरा पढ़ें →

क्या यह पंचांग रोज़ अपडेट होता है?

हाँ, सभी पेज हर रात 12 बजे (भारतीय समय) अपने आप अगले दिन का पंचांग दिखाने लगते हैं। पूरा पढ़ें →

यह पंचांग कितना सही है?

तिथि, नक्षत्र, योग, राहु काल और अभिजीत मुहूर्त के समय प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँचे गए हैं, जिनमें अंतर आमतौर पर 1-2 मिनट का रहा। पूरा पढ़ें →

तिथि और तारीख में क्या अंतर है?

अंग्रेज़ी तारीख आधी रात को बदलती है और हर दिन 24 घंटे का होता है। तिथि चंद्रमा और सूर्य की दूरी से बनती है, इसलिए वह दिन के किसी भी समय बदल सकती है और उसकी लंबाई भी रोज़ अलग होती है। पूरा पढ़ें →

एक तिथि कितने घंटे की होती है?

औसतन लगभग साढ़े 23 घंटे। चंद्रमा की चाल के हिसाब से कोई तिथि लगभग 20 घंटे की और कोई 27 घंटे तक की भी होती है। पूरा पढ़ें →

उदया तिथि क्या होती है?

सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, उसे उस दिन की उदया तिथि कहते हैं। ज़्यादातर व्रत, स्नान-दान और त्योहार उदया तिथि से ही तय होते हैं। पूरा पढ़ें →

शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष क्या है?

अमावस्या के बाद चंद्रमा बढ़ता है, इसे शुक्ल पक्ष कहते हैं और यह पूर्णिमा पर पूरा होता है। पूर्णिमा के बाद चंद्रमा घटता है, इसे कृष्ण पक्ष कहते हैं और यह अमावस्या पर खत्म होता है। हर पक्ष में 15 तिथियाँ होती हैं। पूरा पढ़ें →

पूर्णिमांत और अमांत महीने में क्या अंतर है?

उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा के बाद बदलता है (पूर्णिमांत), जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में अमावस्या के बाद (अमांत)। इसलिए कृष्ण पक्ष में दोनों पद्धतियों में महीने का नाम अलग होता है। इस पेज पर पूर्णिमांत महीना दिखाया गया है। पूरा पढ़ें →

क्षय तिथि क्या होती है?

जब कोई तिथि एक भी सूर्योदय को नहीं छूती, तो वह किसी दिन की उदया तिथि नहीं बनती। उसे क्षय तिथि कहते हैं। जब कोई तिथि दो सूर्योदयों तक चले, तो उसे वृद्धि तिथि कहते हैं। पूरा पढ़ें →

शुभ मुहूर्त15 सवाल

विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, वाहन और संपत्ति खरीद।

संपत्ति खरीद के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

इस सूची में ये नक्षत्र लिए गए हैं: मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, विशाखा, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद, रेवती। पूरा पढ़ें →

अलग-अलग पंचांगों में मुहूर्त अलग क्यों होते हैं?

कुछ पंचांग लग्न, चंद्र बल या दूसरे दोषों को भी जोड़ते हैं, इसलिए कुछ दिनों में फर्क आ जाता है। इस सूची की सभी तारीखें प्रचलित पंचांग की सूची में भी मौजूद हैं, और उस सूची की लगभग 87% तारीखें यहाँ हैं। पूरा पढ़ें →

वाहन खरीद के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

इस सूची में ये नक्षत्र लिए गए हैं: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती। पूरा पढ़ें →

नामकरण के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

इस सूची में ये नक्षत्र लिए गए हैं: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती। पूरा पढ़ें →

मुंडन के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

इस सूची में ये नक्षत्र लिए गए हैं: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती। पूरा पढ़ें →

गृह प्रवेश के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

इस सूची में ये नक्षत्र लिए गए हैं: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती। पूरा पढ़ें →

विवाह के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

इस सूची में ये नक्षत्र लिए गए हैं: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती। पूरा पढ़ें →

मुहूर्त किस शहर के समय से दिए गए हैं?

सभी समय नई दिल्ली के हैं। तारीखें पूरे भारत के लिए लगभग एक जैसी रहती हैं। पूरा पढ़ें →

अंतिम मुहूर्त कैसे तय करें?

सूची से दिन चुनने के बाद अपने परिवार की राशि और स्थानीय लग्न के हिसाब से पंडित से अंतिम समय तय करवाएँ। पूरा पढ़ें →

अभिजीत मुहूर्त क्या है?

दिन को 15 मुहूर्तों में बाँटने पर आठवाँ मुहूर्त अभिजीत कहलाता है। यह दोपहर के आसपास लगभग 45-50 मिनट का होता है और ज़्यादातर कामों के लिए शुभ माना जाता है। पूरा पढ़ें →

बुधवार को अभिजीत मुहूर्त क्यों नहीं होता?

परंपरा के अनुसार बुधवार को अभिजीत मुहूर्त शुभ नहीं माना जाता, इसलिए उस दिन इसे मुहूर्त के रूप में नहीं लिया जाता। पूरा पढ़ें →

ब्रह्म मुहूर्त कब होता है?

रात को 15 मुहूर्तों में बाँटने पर सूर्योदय से पहले के दूसरे आखिरी मुहूर्त को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं। यह सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पहले शुरू होता है। पूरा पढ़ें →

ब्रह्म मुहूर्त में क्या करना चाहिए?

ब्रह्म मुहूर्त को ध्यान, जप, पूजा और पढ़ाई के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। पूरा पढ़ें →

विवाह और गृह प्रवेश का मुहूर्त कैसे देखें?

विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे बड़े संस्कारों के मुहूर्त में तिथि, नक्षत्र, लग्न और कई दोष देखे जाते हैं। 2027 के ऐसे सभी मुहूर्त हमारे शुभ मुहूर्त 2027 पेज पर दिए हैं, अंतिम समय अपने पंडित से तय करवाएँ। पूरा पढ़ें →

राहु काल में शुभ काम क्यों नहीं करते?

परंपरा में राहु काल को नया शुभ काम शुरू करने के लिए अशुभ माना जाता है, इसलिए मुहूर्त चुनते समय राहु काल से बचा जाता है। पूरा पढ़ें →

राशि, नक्षत्र और ग्रह15 सवाल

12 राशियाँ, 27 नक्षत्र, नवग्रह और राशिफल।

9 ग्रहों के नाम क्या हैं?

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु। इन्हें मिलाकर नवग्रह कहते हैं। पूरा पढ़ें →

राहु और केतु क्या हैं?

राहु और केतु छाया ग्रह हैं। ये आकाश में वे दो बिंदु हैं जहाँ चंद्रमा का मार्ग सूर्य के मार्ग को काटता है। इन्हीं के पास अमावस्या या पूर्णिमा होने पर ग्रहण लगता है। पूरा पढ़ें →

कौन सा ग्रह किस वार का स्वामी है?

रविवार सूर्य, सोमवार चंद्र, मंगलवार मंगल, बुधवार बुध, गुरुवार गुरु, शुक्रवार शुक्र और शनिवार शनि का दिन है। पूरा पढ़ें →

सबसे धीमा ग्रह कौन सा है?

नवग्रहों में शनि सबसे धीमा है, यह एक राशि में लगभग ढाई वर्ष रहता है। इसी से साढ़ेसाती (साढ़े सात साल) बनती है। पूरा पढ़ें →

ग्रहों के रत्न कौन से हैं?

सूर्य माणिक्य, चंद्र मोती, मंगल मूंगा, बुध पन्ना, गुरु पुखराज, शुक्र हीरा, शनि नीलम, राहु गोमेद और केतु लहसुनिया। रत्न कुंडली दिखाकर ही पहनें। पूरा पढ़ें →

12 राशियों के नाम क्या हैं?

मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन। पूरा पढ़ें →

मेरी राशि कौन सी है?

जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था वही आपकी राशि है। इसे जन्म तारीख, समय और स्थान से मुफ़्त जन्म रिपोर्ट में आसान हिंदी में देख सकते हैं। पूरा पढ़ें →

नाम से राशि कैसे पता करें?

नाम के पहले अक्षर को पेज की तालिका के “नाम अक्षर” कॉलम में खोजें। जैसे “चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ” से शुरू होने वाले नाम मेष राशि के माने जाते हैं। पूरा पढ़ें →

राशियों के स्वामी ग्रह कौन से हैं?

मेष-वृश्चिक का मंगल, वृषभ-तुला का शुक्र, मिथुन-कन्या का बुध, कर्क का चंद्र, सिंह का सूर्य, धनु-मीन का गुरु और मकर-कुंभ का शनि। पूरा पढ़ें →

कुल कितने नक्षत्र होते हैं?

ज्योतिष में 27 नक्षत्र माने जाते हैं, अश्विनी से रेवती तक। मुहूर्त में कभी-कभी अभिजीत को 28वाँ नक्षत्र भी गिना जाता है। पूरा पढ़ें →

मेरा जन्म नक्षत्र कैसे पता करें?

जन्म तारीख, समय और स्थान से जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति निकाली जाती है। हमारे नाम अक्षर टूल या कुंडली टूल में यह मुफ़्त निकलता है। पूरा पढ़ें →

गंडमूल नक्षत्र कौन से हैं?

अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती, ये 6 गंडमूल नक्षत्र हैं। पूरा पढ़ें →

नक्षत्रों का राजा कौन सा है?

परंपरा में पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है और इसे खरीदारी व शुभ कामों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। पूरा पढ़ें →

राशिफल नाम से देखें या जन्म राशि से?

जन्म के समय की चंद्र राशि सबसे सही है। जन्म समय न पता हो तो नाम के पहले अक्षर से बनी नाम राशि देखी जा सकती है। पूरा पढ़ें →

ग्रह वक्री क्यों होते हैं?

पृथ्वी और दूसरे ग्रह अलग-अलग गति से सूर्य की परिक्रमा करते हैं। जब पृथ्वी किसी ग्रह को पीछे छोड़ती है, तो वह ग्रह कुछ समय के लिए आकाश में उल्टा चलता दिखता है। पूरा पढ़ें →

कुंडली, कुंडली मिलान और जन्म रिपोर्ट43 सवाल

मुफ़्त टूल, मांगलिक दोष, गुण मिलान और नाम अक्षर।

जन्म तारीख से अपनी राशि कैसे पता करें?

भारतीय ज्योतिष में आपकी राशि वह है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था। टूल में जन्म तारीख, समय और स्थान डालें, रिपोर्ट में सबसे ऊपर आपकी चंद्र राशि और नक्षत्र दिख जाएँगे। पूरा पढ़ें →

जन्म समय पता न हो तो क्या रिपोर्ट बनेगी?

हाँ। बिना समय के राशि, नक्षत्र, मूलांक, साढ़ेसाती और अच्छे दिन मिल जाएँगे। लग्न, पक्का मांगलिक नतीजा और दशा के लिए जन्म समय ज़रूरी है। अगर आपके जन्म वाले दिन ही चंद्रमा की राशि या नक्षत्र बदला हो, तो रिपोर्ट आपको समय डालने को कहेगी। पूरा पढ़ें →

मेरी साढ़ेसाती चल रही है या नहीं, कैसे पता करें?

जब शनि आपकी चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में होता है, तब साढ़ेसाती चलती है। रिपोर्ट आपकी राशि से शनि की स्थिति देखकर बताती है कि साढ़ेसाती या ढैया चल रही है या नहीं, कौन सा चरण है और कब खत्म होगी। पूरा पढ़ें →

मूलांक और भाग्यांक कैसे निकालते हैं?

जन्म तारीख के अंकों को तब तक जोड़ें जब तक एक अंक न बचे, वही मूलांक है। जैसे 18 तारीख: 1 + 8 = 9। पूरी जन्म तारीख (दिन, महीना और साल) के सभी अंकों का जोड़ भाग्यांक होता है। पूरा पढ़ें →

रिपोर्ट में अच्छे दिन कैसे निकाले जाते हैं?

परंपरा के चंद्र बल और तारा बल नियम से। जिस दिन चंद्रमा आपकी राशि से पहले, तीसरे, छठे, सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में हो और आपके जन्म नक्षत्र से शुभ तारा (संपत, क्षेम, साधक, मित्र या परम मित्र) में हो, वह दिन आपके लिए अनुकूल माना जाता है। पूरा पढ़ें →

क्या यह रिपोर्ट पक्की भविष्यवाणी है?

नहीं। यह परंपरागत ज्योतिष की मान्यताओं पर आधारित सामान्य मार्गदर्शन है। सेहत, पैसे या कानूनी फ़ैसले इसके भरोसे न लें, और बड़े फ़ैसलों में योग्य जानकार से सलाह लें। पूरा पढ़ें →

क्या मेरी जानकारी सेव होती है?

नहीं। पूरी गणना आपके फ़ोन या कंप्यूटर के ब्राउज़र में होती है। आपका नाम और जन्म विवरण किसी सर्वर पर नहीं भेजा जाता और न सेव होता है। WhatsApp पर भेजने वाले संदेश में भी आपकी जन्म तारीख नहीं जाती। पूरा पढ़ें →

दूसरी वेबसाइट से राशि अलग क्यों आती है?

कुछ जगह पश्चिमी सूर्य राशि (Sun sign) बताई जाती है, जबकि भारतीय ज्योतिष चंद्र राशि मानता है। अयनांश अलग लेने या जन्म समय में गलती से भी नक्षत्र और लग्न बदल सकते हैं। हम लाहिड़ी अयनांश लेते हैं, जो भारत में सबसे ज़्यादा माना जाता है। पूरा पढ़ें →

रिपोर्ट को सेव या प्रिंट कैसे करें?

रिपोर्ट के नीचे “रिपोर्ट सेव करें / प्रिंट” बटन दबाएँ। फ़ोन पर प्रिंट वाली स्क्रीन में “PDF के रूप में सेव करें” चुनकर इसे फ़ाइल बना सकते हैं। पूरा पढ़ें →

नक्षत्र से नाम का अक्षर कैसे निकालते हैं?

जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र और चरण में होता है, उस चरण का तय अक्षर नाम का पहला अक्षर माना जाता है। जैसे अश्विनी के चार चरणों के अक्षर चू, चे, चो, ला हैं। पूरा पढ़ें →

रोहिणी नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?

रोहिणी नक्षत्र के नाम अक्षर ओ, वा, वी, वू हैं। पहले चरण का ओ, दूसरे का वा, तीसरे का वी और चौथे का वू। पूरा पढ़ें →

जन्म समय पता न हो तो नाम अक्षर कैसे जानें?

तारीख डालने पर टूल दोपहर 12 बजे का समय मानकर नक्षत्र बताता है। उस दिन नक्षत्र या चरण बदला हो तो अक्षर अलग हो सकता है, इसलिए नक्षत्र के चारों अक्षर देखें या राशि के अक्षर लें। पूरा पढ़ें →

ङ, ञ, ण, थ, झ जैसे अक्षरों से नाम कैसे रखें?

ऐसे अक्षरों से शुरू होने वाले नाम लगभग नहीं होते, इसलिए परिवार उसी नक्षत्र या राशि का दूसरा अक्षर चुन लेते हैं, जैसे आर्द्रा के लिए कु, घ या छ। पूरा पढ़ें →

राशि अक्षर और नक्षत्र अक्षर में क्या फर्क है?

नक्षत्र अक्षर जन्म के चरण से तय एक ही अक्षर है। राशि अक्षर उस राशि के सभी नौ चरणों के अक्षर हैं। नक्षत्र अक्षर ज़्यादा सटीक माना जाता है। पूरा पढ़ें →

क्या लड़के और लड़की के नाम अक्षर अलग होते हैं?

नहीं। नाम अक्षर केवल जन्म नक्षत्र और चरण पर निर्भर है, लड़के और लड़की दोनों के लिए एक जैसे हैं। पूरा पढ़ें →

अगर पसंद का नाम अक्षर से मेल न खाए तो?

कई परिवार पूजा-पाठ के लिए नक्षत्र अक्षर से जन्म नाम रखते हैं और पुकारने का नाम अपनी पसंद से रखते हैं। यह पूरी तरह परिवार की आस्था और पसंद पर है। पूरा पढ़ें →

अभिजीत नक्षत्र का नाम अक्षर क्या है?

कुछ परंपराओं में 28वाँ नक्षत्र अभिजीत भी माना जाता है, जिसके अक्षर जू, जे, जो, खा बताए जाते हैं। यह टूल प्रचलित 27 नक्षत्रों की पद्धति से अक्षर बताता है। पूरा पढ़ें →

नामकरण संस्कार कब करना चाहिए?

परंपरा में नामकरण जन्म के 11वें या 12वें दिन, या बाद में किसी शुभ दिन किया जाता है। 2027 की शुभ तारीखों के लिए नामकरण मुहूर्त 2027 देखें। पूरा पढ़ें →

मांगलिक दोष क्या होता है?

जब जन्म कुंडली में मंगल लग्न या चंद्र राशि से पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो उसे मांगलिक दोष या मंगल दोष कहते हैं। परंपरा में विवाह से पहले इसे देखा जाता है। पूरा पढ़ें →

कैसे पता करें कि मैं मांगलिक हूँ या नहीं?

टूल में अपनी जन्म तारीख, सही जन्म समय और जन्म स्थान डालें। टूल लग्न, चंद्र राशि और शुक्र से मंगल का भाव निकालकर तुरंत बता देगा। पूरा पढ़ें →

क्या 28 साल के बाद मांगलिक दोष खत्म हो जाता है?

यह एक प्रचलित मान्यता है, क्योंकि मंगल की परिपक्वता की उम्र 28 साल मानी जाती है। लेकिन कुंडली में मंगल की स्थिति उम्र से नहीं बदलती, इसलिए ज़्यादातर ज्योतिषी परिहार के लिए पूरी कुंडली ही देखते हैं। पूरा पढ़ें →

आंशिक मांगलिक किसे कहते हैं?

जब मंगल केवल लग्न से या केवल चंद्र राशि से दोष वाले भाव में हो, या दोष के साथ कोई परिहार भी हो, तो कई ज्योतिषी इसे आंशिक या हल्का मांगलिक दोष कहते हैं। पूरा पढ़ें →

क्या मांगलिक और गैर-मांगलिक की शादी हो सकती है?

हाँ, ऐसी बहुत शादियाँ होती हैं। परंपरा में ज्योतिषी दूसरे जीवनसाथी की कुंडली में परिहार देखते हैं, जैसे उन्हीं भावों में शनि, राहु या केतु का होना। पूरा पढ़ें →

क्या चंद्र राशि से भी मांगलिक दोष देखा जाता है?

हाँ। उत्तर भारत में आमतौर पर लग्न और चंद्र राशि दोनों से मंगल का भाव देखा जाता है। टूल दोनों के नतीजे अलग-अलग दिखाता है। पूरा पढ़ें →

दूसरी वेबसाइट पर मांगलिक दोष का नतीजा अलग क्यों आता है?

कुछ जगह केवल लग्न से देखा जाता है, कुछ दूसरा भाव भी जोड़ती हैं और कुछ शुक्र से भी देखती हैं। जन्म समय में गलती से लग्न बदलने पर भी नतीजा बदल सकता है। पूरा पढ़ें →

जन्म समय पता न हो तो मांगलिक दोष कैसे देखें?

बिना समय के लग्न सही नहीं निकलता, इसलिए लग्न वाला नतीजा भरोसेमंद नहीं होगा। चंद्र राशि से देखा गया नतीजा ज़्यादातर सही रहता है। पूरा पढ़ें →

कुंडली मिलान में कितने गुण मिलने चाहिए?

परंपरा में 36 में से कम से कम 18 गुण मिलना विवाह के लिए स्वीकार्य माना जाता है। 25 से 32 गुण अच्छे और 33 से 36 गुण उत्तम माने जाते हैं। पूरा पढ़ें →

क्या 18 गुण मिलने पर शादी हो सकती है?

18 गुण स्वीकार्य सीमा है। इसके साथ नाड़ी दोष, भकूट दोष और मांगलिक दोष भी देखें, और अंतिम फैसला पूरी कुंडली देखकर करें। पूरा पढ़ें →

नाड़ी दोष क्या होता है?

वर और वधू दोनों के नक्षत्र एक ही नाड़ी (आदि, मध्य या अंत्य) के हों तो नाड़ी के 0 गुण मिलते हैं। इसे नाड़ी दोष कहते हैं और परंपरा में इसे बड़ा दोष माना जाता है। पूरा पढ़ें →

वर और वधू का नक्षत्र एक हो तो क्या शादी हो सकती है?

एक ही नक्षत्र होने पर आमतौर पर 28 गुण मिलते हैं, लेकिन नाड़ी दोष बनता है। नक्षत्र एक हो पर चरण अलग हों तो कई ज्योतिषी इसका परिहार मानते हैं। पूरा पढ़ें →

जन्म समय पता न हो तो क्या गुण मिलान हो सकता है?

हाँ, अनुमानित समय से भी ज़्यादातर सही गुण आते हैं, क्योंकि गुण मिलान चंद्रमा के नक्षत्र पर आधारित है। अगर उस दिन चंद्रमा ने नक्षत्र बदला हो तो नतीजा बदल सकता है। पूरा पढ़ें →

अलग-अलग वेबसाइट पर गुण अलग क्यों आते हैं?

वश्य, योनि, ग्रह मैत्री और तारा की तालिकाएँ अलग ग्रंथों में थोड़ी अलग हैं, और धनु-मकर राशि के वश्य को बाँटने का तरीका भी अलग है। इसलिए 0.5 से 2 गुण का अंतर आम बात है। पूरा पढ़ें →

गुण मिलान में किसका नक्षत्र पहले डालना है?

पहले फ़ॉर्म में वर (लड़के) और दूसरे में वधू (लड़की) का विवरण डालें। वर्ण, वश्य और गण जैसे कूटों में वर और वधू की दिशा से गुण बदलते हैं। पूरा पढ़ें →

जन्म कुंडली बनाने के लिए क्या चाहिए?

जन्म तारीख, सही जन्म समय और जन्म स्थान। समय भारतीय मानक समय (IST) में डालें। जन्म स्थान सूची में न हो तो “दूसरा स्थान” चुनकर उसका अक्षांश और देशांतर डालें। पूरा पढ़ें →

क्या यह कुंडली पूरी तरह मुफ़्त है?

हाँ। जम्भ भक्ति की कुंडली पूरी तरह मुफ़्त है। कोई रजिस्ट्रेशन, मोबाइल नंबर या ईमेल नहीं माँगा जाता। पूरा पढ़ें →

जन्म समय नहीं पता हो तो क्या करें?

बिना सही समय के लग्न और भाव गलत हो सकते हैं। चंद्र राशि और नक्षत्र ज़्यादातर सही आते हैं। नक्षत्र से नाम का अक्षर जानना हो तो नाम अक्षर टूल देखें। पूरा पढ़ें →

लग्न और राशि में क्या फर्क है?

लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्व दिशा में उदय हो रही थी, जबकि राशि (चंद्र राशि) वह है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था। लग्न हर 2 घंटे में बदलता है, चंद्र राशि लगभग सवा दो दिन में। पूरा पढ़ें →

यह कुंडली किस पद्धति से बनती है?

यह निरयण (सिडेरियल) कुंडली है, जिसमें लाहिड़ी अयनांश लिया गया है। भाव पूरी राशि के हिसाब से (एक राशि एक भाव) और चार्ट उत्तर भारतीय शैली में बनता है। पूरा पढ़ें →

दूसरे सॉफ़्टवेयर से ग्रहों के अंश में थोड़ा अंतर क्यों दिखता है?

अलग सॉफ़्टवेयर अलग अयनांश, स्पष्ट या माध्य राहु और दशा के साल की अलग लंबाई लेते हैं। इससे कुछ कला का अंतर और महादशा की तारीखों में कुछ दिनों का अंतर आ सकता है। पूरा पढ़ें →

भारत के बाहर जन्म हो तो कुंडली कैसे बनाएँ?

“दूसरा स्थान” चुनें, फिर जन्म स्थान का अक्षांश, देशांतर और वहाँ का समय क्षेत्र (UTC से घंटे) डालें, जैसे लंदन के लिए 0 या 1, न्यूयॉर्क के लिए -5 या -4। जन्म समय वहीं का स्थानीय समय डालें। पूरा पढ़ें →

महादशा और अंतर्दशा क्या होती है?

महादशा किसी एक ग्रह का लंबा समय है, जैसे शुक्र की 20 साल। हर महादशा के अंदर नौ ग्रहों की छोटी अंतर्दशाएँ चलती हैं। टूल अभी चल रही महादशा और अंतर्दशा अलग रंग में दिखाता है। पूरा पढ़ें →

क्या कुंडली से भविष्य पक्का पता चलता है?

कुंडली जन्म के समय ग्रहों की सटीक स्थिति दिखाती है, लेकिन उसका फलादेश ज्योतिष परंपरा और आस्था का विषय है। ज़रूरी फैसलों में योग्य ज्योतिषी की सलाह के साथ अपनी समझ और परिवार की राय भी लें। पूरा पढ़ें →

क्या यहाँ कुंडली और कुंडली मिलान भी है?

हाँ। जन्म कुंडली , कुंडली मिलान (36 गुण), मांगलिक दोष और नाम अक्षर के मुफ़्त टूल हैं। सारी गणना आपके फ़ोन पर होती है और जानकारी सेव नहीं होती। पूरा पढ़ें →

लोकदेवता और कुलदेवी35 सवाल

बाबा रामदेव, तेजाजी, गोगाजी, पाबूजी, देवनारायण जी और करणी माता।

लोकदेवता किसे कहते हैं?

ऐसे वीर, संत या महापुरुष जिन्होंने लोगों, गायों या अपने वचन की रक्षा के लिए जीवन दिया और बाद में लोक आस्था में देवता के रूप में पूजे जाने लगे। जैसे बाबा रामदेव जी, वीर तेजाजी, गोगाजी, पाबूजी और देवनारायण जी। पूरा पढ़ें →

कुलदेवी और इष्टदेव में क्या अंतर है?

कुलदेवी पूरे वंश या गोत्र की रक्षक देवी होती हैं, जिनकी पूजा पीढ़ियों से चलती है। इष्टदेव वह देवता हैं जिन्हें कोई व्यक्ति अपनी श्रद्धा से सबसे ज़्यादा मानता है। पूरा पढ़ें →

राजस्थान के पंच पीर कौन हैं?

पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया और गोगाजी। पूरा पढ़ें →

राठौड़ों की कुलदेवी कौन हैं?

राठौड़ वंश की कुलदेवी नागणेची माता मानी जाती हैं, जिनका प्राचीन मंदिर बाड़मेर ज़िले के नागाणा में है। बीकानेर के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी करणी माता भी मानी जाती हैं। पूरा पढ़ें →

अपनी कुलदेवी कैसे पता करें?

परिवार के बुज़ुर्गों, अपने राव या भाट की बही, गोत्र के दूसरे परिवारों या कुलगुरु से पता कर सकते हैं। पूरा पढ़ें →

करणी माता मंदिर कहाँ है?

राजस्थान के बीकानेर ज़िले में देशनोक कस्बे में, बीकानेर शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर। पूरा पढ़ें →

करणी माता मंदिर में चूहे क्यों हैं?

लोक मान्यता है कि ये चूहे (काबा) करणी माता के वंशज चारणों के पुनर्जन्म हैं, इसलिए इन्हें पवित्र मानकर दूध और प्रसाद चढ़ाया जाता है। पूरा पढ़ें →

करणी माता किसकी कुलदेवी हैं?

बीकानेर के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी मानी जाती हैं, और चारण समाज की आराध्य देवी हैं। पूरा पढ़ें →

देशनोक में मेला कब लगता है?

चैत्र और आश्विन (शारदीय) नवरात्रि में। इस साल की तारीखें ऊपर दी गई हैं। पूरा पढ़ें →

सफ़ेद चूहे का दर्शन क्यों शुभ माना जाता है?

मंदिर में हज़ारों काले-भूरे चूहों के बीच सफ़ेद चूहे बहुत कम दिखते हैं, और मान्यता है कि उनका दर्शन करणी माता की विशेष कृपा का संकेत है। पूरा पढ़ें →

देवनारायण जयंती कब है?

माघ शुक्ल सप्तमी को। इस साल की तारीख ऊपर दी गई है। पूरा पढ़ें →

देवनारायण जी का जन्म कहाँ हुआ था?

भीलवाड़ा ज़िले की आसींद तहसील में मालासेरी डूंगरी पर। पूरा पढ़ें →

देवनारायण जी के माता-पिता कौन थे?

पिता सवाई भोज (बगड़ावत) और माता साडू माता। पूरा पढ़ें →

देवनारायण जी का मुख्य मंदिर कौन सा है?

आसींद (भीलवाड़ा) का सवाई भोज मंदिर सबसे प्रमुख है। देवमाली (ब्यावर), देवधाम जोधपुरिया (टोंक) और देव डूंगरी (चित्तौड़गढ़) भी प्रसिद्ध धाम हैं। पूरा पढ़ें →

पाबूजी को ऊँटों का देवता क्यों कहते हैं?

लोक मान्यता है कि मारवाड़ में ऊँट लाने का श्रेय पाबूजी को है। इसलिए ऊँट पालने वाले राईका-रेबारी समाज उन्हें ऊँटों का देवता मानता है और पशु बीमार होने पर उनकी तांती बाँधता है। पूरा पढ़ें →

पाबूजी की फड़ क्या है?

कपड़े पर बनी लगभग 30 फुट लंबी चित्र-कथा, जिसे भोपे रावणहत्था बजाकर गीतों में बाँचते हैं। इसमें पाबूजी के जीवन की घटनाएँ होती हैं। पूरा पढ़ें →

पाबूजी का मेला कब और कहाँ लगता है?

चैत्र अमावस्या को कोलू (कोलूमंड) में। इस साल की तारीख ऊपर दी गई है। पूरा पढ़ें →

पाबूजी की घोड़ी का नाम क्या था?

केसर कालमी, जो देवल चारणी ने उन्हें दी थी। पूरा पढ़ें →

गोगा नवमी कब मनाई जाती है?

भाद्रपद कृष्ण नवमी को, जो आमतौर पर जन्माष्टमी के अगले दिन पड़ती है। इस साल की तारीख ऊपर दी गई है। पूरा पढ़ें →

गोगाजी को जाहरवीर क्यों कहते हैं?

गोगाजी को ज़हर (जहर) से रक्षा करने वाले वीर के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उन्हें जाहरवीर कहा जाता है। पूरा पढ़ें →

गोगामेड़ी कहाँ है?

राजस्थान के हनुमानगढ़ ज़िले में नोहर तहसील में। यहाँ गोगाजी की समाधि है। पूरा पढ़ें →

गोगाजी के माता-पिता कौन थे?

पिता जेवर जी चौहान और माता बाछल। पूरा पढ़ें →

गोगाजी को कौन मानता है?

हिंदू और मुस्लिम दोनों। राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और उत्तर प्रदेश में भी उनकी पूजा होती है। पूरा पढ़ें →

तेजा दशमी क्यों मनाई जाती है?

वीर तेजाजी ने गायों की रक्षा के बाद अपना वचन निभाते हुए साँप से डसवाकर प्राण दिए थे। यह घटना भाद्रपद शुक्ल दशमी को मानी जाती है, इसलिए उनकी याद में यह दिन तेजा दशमी के रूप में मनाया जाता है। पूरा पढ़ें →

वीर तेजाजी का जन्म कहाँ हुआ था?

नागौर ज़िले के खरनाल गाँव में, माघ शुक्ल चतुर्दशी को। ज़्यादातर स्रोत विक्रम संवत 1130 बताते हैं। पूरा पढ़ें →

तेजाजी के माता-पिता कौन थे?

पिता ताहड़ जी और माता रामकुँवरी। पूरा पढ़ें →

तेजाजी का देहांत कहाँ हुआ?

अजमेर ज़िले में किशनगढ़ के पास सुरसुरा में, भाद्रपद शुक्ल दशमी को। पूरा पढ़ें →

तेजाजी की तांती क्या होती है?

तेजाजी के नाम का धागा, जिसे साँप के काटने से रक्षा की मान्यता के साथ बाँधा जाता है। साँप के काटने पर सबसे पहले तुरंत अस्पताल जाएँ। पूरा पढ़ें →

तेजाजी को किस समाज के लोग मानते हैं?

जाट समाज में उनकी विशेष आस्था है, लेकिन किसान, पशुपालक और कई समाजों के लोग उन्हें लोकदेवता के रूप में पूजते हैं। पूरा पढ़ें →

बाबा रामदेव जी को रामसा पीर क्यों कहते हैं?

लोक कथा के अनुसार मक्का से आए पाँच पीर उनके चमत्कार देखकर उन्हें पीरों का पीर मान गए। तभी से मुस्लिम भक्त उन्हें रामसा पीर कहते हैं और हिंदू कृष्ण का अवतार मानते हैं। पूरा पढ़ें →

रामदेव जयंती कब मनाई जाती है?

भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को, जिसे बाबा री बीज कहते हैं। इसी दिन से रामदेवरा में भादवा मेला शुरू होता है। इस साल की तारीख ऊपर दी गई है। पूरा पढ़ें →

रामदेव जी ने समाधि कब ली?

भाद्रपद शुक्ल एकादशी को रुणिचा (रामदेवरा) में। कई ऐतिहासिक स्रोत इसका साल 1458 ई. बताते हैं। पूरा पढ़ें →

रामदेव जी के माता-पिता कौन थे?

पिता अजमल जी तंवर और माता मैणादे। उनके बड़े भाई का नाम वीरमदेव था। पूरा पढ़ें →

डाली बाई कौन थीं?

डाली बाई मेघवाल समाज की रामदेव जी की परम भक्त थीं। रामदेव जी ने उन्हें बहन का मान दिया। उनकी समाधि भी रामदेवरा में बाबा की समाधि के पास है। पूरा पढ़ें →

रामदेवरा कहाँ है?

राजस्थान के जैसलमेर ज़िले में पोकरण के पास। जोधपुर-जैसलमेर रेल मार्ग पर रामदेवरा रेलवे स्टेशन है। पूरा पढ़ें →

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