
Ashadha Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Katha (Ashadha Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Katha)
Ashadha Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Katha
गणेश जी (गणपति, गजानन) के भजन, आरती, मंत्र और संकष्टी चतुर्थी व्रत कथाएँ।

Ashadha Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Katha

Ashadha Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Katha

गज और असुर के संयोग से एक असुर जन्मा था, गजासुर। उसका

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि

पूर्वकाल में राजाओं में श्रेष्ठ राजा नल था उसकी रूपवती रानी का

प्रत्येक माह में आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी

युधिष्ठिर ने भगवान से पूछा हे कृष्णजी! मैंने सुना है कि आश्विन

पार्वती जी कहती हैं कि हे भाग्यशाली ! लम्बोदर ! भाषणकर्ताओं में

एक समय कैलाश में माता पार्वती तथा श्री गणेश जी महाराज विराजमान

एक बार पार्वती जी ने गणेशजी से पूछा कि वैशाख माह के

सतयुग में सौ यज्ञ करने वाले एक पृथु नामक राजा हुए। उनके

गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् । उमासुतं शोक

गौरीनन्दन गजानना गौरीनन्दन गजानना गिरिजानन्दन निरञ्जना गिरिजानन्दन निरञ्जना पार्वतीनन्दन शुभानना पार्वतीनन्दन शुभानना

श्री गणेश के 108 नाम और उनसे जुड़े मंत्र। गजानन- ॐ गजाननाय

माता के दशों महाविद्याओं रूपों के अलग-अलग भैरव तथा गणेश हैं। श्री

ऋण से छुटकारा पाने हेतु ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र का नियमित पाठ करने

सनातन पूजा पद्धति में अंग पूजा किसी भी देव पूजा अनुष्ठान का

श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र! मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् । अनायकैकनायकं

किसी भी प्रकार के कार्य प्रारंभ करने के पूर्व श्री गणेश जी

॥ दोहा ॥ जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल । विघ्न