सबद 5: अइयालो अपरंपर बाणी
शब्दवाणी का सबद 5 "अइयालो अपरंपर बाणी" से शुरू होता है। इसमें 10 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् अइयालो अपरंपर बाणी, म्हे जपां न जाया जीऊं।नव अवतार नमो नारायण, तेपण रूप हमारा थीयूं।जपी तपी तकपीर ऋषेश्वर, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं।खेचर भूचर खेत्रपाला परगट गुप्ता, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं।वासग शेष गुणिंदा फुणिंदा, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं।चोषट जोगनी बावन भैरूं, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं।जपां तो एक निरालंभ शिम्भू, जिहिं के माई न पीऊं।न तन रक्तूं न तन धातूं, न तन ताव न सीऊं।सर्व सिरजत मरत विवरजत, तास न मूल ज लेणा कीयों।अइयालो अपरंपर बाणी, म्हे जपां न जाया जीऊं।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 5 कौन सा है?
सबद 5 की पहली पंक्ति है: ओ३म् अइयालो अपरंपर बाणी, म्हे जपां न जाया जीऊं।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
