सबद 65: तउवा जाग जु गोरख जाग्या
शब्दवाणी का सबद 65 "तउवा जाग जु गोरख जाग्या" से शुरू होता है। इसमें 23 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् तउवा जाग जु गोरख जाग्या, निरह निरंजन निरह निरालंब।जुग छतीसों एकै आसन बैठा बरत्या, अवर भी अवधूं जागत जागूं।तउवा त्यागज ब्रह्मा त्यागा, अवर भी त्यागत त्यागूं।तउवा भाग जो ईश्वर मस्तक, अवर भी मस्तक भागूं।तउवा सीर जो ईश्वर गौरी, अवर भी कहियत सीरूं।तउवा वीर जो राम लक्ष्मण, अवर भी कहियत बीरूं।तउवा पाग जो दश सिर बांधी, अवर भी बांधत पागूं।तउवा लाज जो सीता लाजी, अवर भी लाजत लाजूं।तउवा बाजा राम बजाया, अवर बजावत बाजूं।तउवा पाज जो सीता कारण लक्ष्मण बांधी, अवर भी बांधत पाजूं।तउवा काज जो हनुमत सारा, अवर भी सारत काजूं।तउवा खागज जो कुम्भकरण महरावण खाज्या, अवर भी खावत खागूं।तउवा राज दुर्योधन माण्या, अवर भी माणत राजूं।तउवा राग ज कन्हड़ बांणी, अवर भी कहिये रागूं।तउवा माघ तुरंगम तेजी, टटू तणां भी माघूं।तउवा बागज हंसा टोली, बगुला टोली भी बागूं।तउवा नाग उद्यावल कहिये, गरूड़ सीया भी नागूं।तउवा सागज नागर बेली, कूकर बगरा भी सागूं।जां जां शैतानी करै उफारूं, तां तां महंत ज फलियो।जुरा जम राक्षस जुरा जुरिन्द्र, कंश केशी चंडरूं।मधु कीचक हिरणाक्ष, हीरणाकुश।चक्रधर बलदेऊं, पावत वासुदेवों।मंडलिक कांय न जोयबा, इहिं धर उपर रती न रहीबा राजूं।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 65 कौन सा है?
सबद 65 की पहली पंक्ति है: ओ३म् तउवा जाग जु गोरख जाग्या, निरह निरंजन निरह निरालंब।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
