सबद 13: कांय रे मुरखा तै जन्म गुमायो
शब्दवाणी का सबद 13 "कांय रे मुरखा तै जन्म गुमायो" से शुरू होता है। इसमें 20 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् कांय रे मुरखा तै जन्म गुमायो, भुंय भारी ले भारूं।जां दिन तेरे होम नै जाप नै, तप नै किरिया।गुरु नै चीन्हौं पन्थ न पायो, अहल गई जमवारूं।ताती बेला ताव न जाग्यो, ठाढ़ी बेला ठारूं।बिंम्बै बैला विष्णु न जंप्यो, तातै बहुत भई कसवारूं।खरी न खाटी देह बिणाठी, थीर न पवना पारूं।अहनिश आव घटंती जावै, तेरे श्वांस सबी कसवारूं।जा जन मन्त्र विष्णु न जंप्यो, ते नर कुबरण कालूं।जा जन मन्त्र विष्णु न जंप्यो, ते नगरे कीर कहारूं।जा जन मन्त्र विष्णु न जंप्यो, ते कांध सहै दुख भारूं।जा जन मन्त्र विष्णु न जंप्यो, ते घण तण करै अहारूं।जा जन मन्त्र विष्णु न जंप्यो, ताको लोही मांस विकारूं।जा जन मन्त्र विष्णु न जंप्यो, गावै गाडर सहरै सुवर जन्म जन्म अवतारूं।जा जन मन्त्र विष्णु न जंप्यो, ओडा के घर पोहण होयसी, पीठ सहै दुःख भारूं।जा जन मन्त्र विष्णु न जंप्यो, राने वासो मोनी बैसे ढ़ूकै सूर सवारूं।जा जन मन्त्र विष्णु न जंप्यो, ते अचल उठावत भारूं।जा जन मन्त्र विष्णु न जंप्यो, ते न उतरिबा पारूं।जा जन मन्त्र विष्णु न जंप्यो, ते नर दौरे घुप अंधारूं।तातै तंत न मंत न जड़ी न बूंटी, ऊंडी पड़ी पहारूं।विष्णु न दोष किसो रे प्राणी, तेरी करणी का उपकारूं।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 13 कौन सा है?
सबद 13 की पहली पंक्ति है: ओ३म् कांय रे मुरखा तै जन्म गुमायो, भुंय भारी ले भारूं।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
