सबद 58: तउवा माण दुर्योधन माण्या
शब्दवाणी का सबद 58 "तउवा माण दुर्योधन माण्या" से शुरू होता है। इसमें 26 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् तउवा माण दुर्योधन माण्या, अवर भी माणत माणों।तउवा दान जूं कृष्णी माया, अवर भी फूलत दानों।तउवा जाण जो सहस्र झूझ्या, अवर भी झूझत जाणों।तउवा बाण जो सीता कारण लक्ष्मण खेंच्या, अवर भी खेंचत बाणों।जपी तपी तकपीर ऋषीश्वर, तोल रह्या शैतानों।तिण किण खैंच न सके, शिंभु तणी कमाणूं।तेऊ पार पहुंता नांहि, ते कीयों आपो भाणों।तेऊ पार पहूंता नांही, ताकी धोती रही अस्माणों।बारां काजै हरकत आई, अध बिच मांड्यो थाणों।नारसिंह नर नराज नरवों, सुराज सुरवों, नरां नरपति सुरां सुरपति।ज्ञान न रिंदो बहुगुण चिंदो, पहलूं प्रहलादा आप पतलीयों।दूजा काजै काम बिटलीयो, खेत मुक्त ले पंच करोड़ी।सो प्रहलादा गुरु की वाचा बहियो, ताका शिखर अपारूं।ताको तो वैकुण्ठे वासो, रतन काया दे सौंप्या छलत भण्डारूं।तेऊ तो उरवारे थाणों, अई अमाणों, तत समाणों, बहु परमाणों पार पहुंचण हारा।लंका के नर शूर संग्रामें घणा विरामें, काले काने भला तिकंट।पहले झूझ्या बाबर झंट, पड़े ताल समंदा पारी, तेऊ रहिया लंक दवारी।खेत मुक्तले सात करोड़ी, परशुराम के हुकम जे मूवा।से तो कृष्ण पियारा, ताको तो वैकुण्ठे वासो।रतन काया दे सौंप्या छलत भण्डारूं, तेऊ तो उरवारे थाणों।अई अमाणों, पार पहुंचन हारा।काफर खानों बुद्धि भराड़ो, खेत मुक्तले नव करोड़ी।राव युधिष्ठिर से तो कृष्ण पियारा, ताको तो वैकुण्ठे वासो।रतन काया दे सौंप्या छलत भण्डारूं, तेऊ तो उरवारे थाणों।अई अमाणों बहु परमाणों, पार पहुंचन हारा।बारा काजै हरकत आई, तातै बहुत भई कसवारूं।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 58 कौन सा है?
सबद 58 की पहली पंक्ति है: ओ३म् तउवा माण दुर्योधन माण्या, अवर भी माणत माणों।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
