सबद 23: साल्हिया हुवा मरण भय भागा
शब्दवाणी का सबद 23 "साल्हिया हुवा मरण भय भागा" से शुरू होता है। इसमें 9 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् साल्हिया हुवा मरण भय भागा, गाफिल मरणै घणा डरै।सतगुरु मिलियो सतपन्थ बतायो, भ्रान्त चुकाई, मरणे बहु उपकार करे।रतन काया सोभंति लाभै, पार गिराये जीव तिरै, पार गिराये सनेही करणी।जंपो विष्णु न दोय दिल करणी, जंपो विष्णु न निंदा करणी।मांडो कांध विष्णु के सरणै, अतरा बोल करोजे साचा तो पार गिराय गुरु की वाचा।रवणां ठवणां चवरां भवणां, ताहि परेरै रतन काया छै, लाभै किसे विचारे।जे नविये नवणी, खविये खवणी, जरिये जरणी।करिये करणी, तो सीख हुवां घर जाइये।रतन काया सांचे की ढ़ोली, गुरु प्रसादे, केवल ज्ञाने धर्म आचारे शीले संजमें, सतगुरु तुठे पाइये।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 23 कौन सा है?
सबद 23 की पहली पंक्ति है: ओ३म् साल्हिया हुवा मरण भय भागा, गाफिल मरणै घणा डरै।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
