सबद 40: सप्त पताले तिहूं त्रिलोके
शब्दवाणी का सबद 40 "सप्त पताले तिहूं त्रिलोके" से शुरू होता है। इसमें 3 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् सप्त पताले तिहूं त्रिलोके, चवदा भवने गगन गहीरे।बाहर भीतर सर्व निरंतर, जहां चीन्हों तहां सोई।सतगुरु मिलियों सतपंथ बतायो, भ्रान्त चुकाई, अवर न बुझबा कोई।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
सभी सबद
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 40 कौन सा है?
सबद 40 की पहली पंक्ति है: ओ३म् सप्त पताले तिहूं त्रिलोके, चवदा भवने गगन गहीरे।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
