सबद 84: मूंड मुंडायो मन न मुंडायो
शब्दवाणी का सबद 84 "मूंड मुंडायो मन न मुंडायो" से शुरू होता है। इसमें 4 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् मूंड मुंडायो मन न मुंडायो, मूंहि अबखल दिल लोभी।अन्दर दया नहीं सुरकाने, निंदरा हड़ै कसोभी।गुरु गति छूटी टोट पड़ैला, उनकी आवा पख सातों।वैं करणी हूंता खूंधा, असी सहस नव लाख भवैला कुंभी दौरे ऊंधा।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 84 कौन सा है?
सबद 84 की पहली पंक्ति है: ओ३म् मूंड मुंडायो मन न मुंडायो, मूंहि अबखल दिल लोभी।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
