2027 में शनि मीन और मेष राशि में, गुरु सिंह, कर्क और कन्या में और राहु मकर राशि में रहेगा। साढ़ेसाती: मेष, वृषभ, कुंभ और मीन। ढैया: सिंह, कन्या, धनु और मकर। सभी 12 राशियों का साल का फल नीचे है।
शनि: साल की शुरुआत से 2 जून तक मीन राशि में, 3 जून से 19 अक्टूबर तक मेष राशि में, 20 अक्टूबर से साल के अंत तक मीन राशि में (वक्री होकर वापस)।
गुरु (बृहस्पति): साल की शुरुआत से 24 जनवरी तक सिंह राशि में, 25 जनवरी से 25 जून तक कर्क राशि में (वक्री होकर वापस), 26 जून से 25 नवंबर तक सिंह राशि में, 26 नवंबर से साल के अंत तक कन्या राशि में।
राहु: पूरे साल मकर राशि में। केतु हमेशा राहु से सातवीं राशि में: पूरे साल कर्क राशि में।
सभी राशि परिवर्तन जम्भ भक्ति की अपनी गणना (निरयण, लाहिड़ी अयनांश) से हैं। राशि बदलने का सही समय: ग्रह गोचर 2027।
शनि की साढ़ेसाती और ढैया 2027
राशि
2027 में
मेष
साढ़ेसाती, पूरे साल पहला चरण: 1 जनवरी से 2 जून और 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर; दूसरा (बीच का) चरण: 3 जून से 19 अक्टूबर
वृषभ
साढ़ेसाती पहला चरण: 3 जून से 19 अक्टूबर
सिंह
ढैया आठवाँ भाव (अष्टम): 1 जनवरी से 2 जून और 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर
कन्या
ढैया आठवाँ भाव (अष्टम): 3 जून से 19 अक्टूबर
धनु
ढैया चौथा भाव (कंटक): 1 जनवरी से 2 जून और 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर
मकर
ढैया चौथा भाव (कंटक): 3 जून से 19 अक्टूबर
कुंभ
साढ़ेसाती आखिरी चरण: 1 जनवरी से 2 जून और 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर
मीन
साढ़ेसाती, पूरे साल दूसरा (बीच का) चरण: 1 जनवरी से 2 जून और 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर; आखिरी चरण: 3 जून से 19 अक्टूबर
चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में शनि हो तो साढ़ेसाती, और चौथे या आठवें भाव में हो तो ढैया मानी जाती है।
मेष राशिफल 2027
साल का कुल फल: सावधानी वाला
शनि बारहवें भाव में (1 जनवरी से 2 जून; 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर): साढ़ेसाती का पहला चरण: खर्च बढ़ेंगे, नींद और सेहत का ध्यान रखें। दूर की यात्रा के योग।
शनि पहले भाव में (3 जून से 19 अक्टूबर): साढ़ेसाती का बीच वाला चरण: मेहनत ज़्यादा और नतीजे धीरे मिलेंगे। मन और सेहत पर दबाव रहेगा, धैर्य और अनुशासन से ही आगे बढ़ेंगे।
गुरु पाँचवें भाव में (1 जनवरी से 24 जनवरी; 26 जून से 25 नवंबर): पढ़ाई, संतान और नई योजनाओं के लिए बहुत शुभ।
गुरु चौथे भाव में (25 जनवरी से 25 जून): घर-परिवार की ज़िम्मेदारियाँ बढ़ेंगी, मन की शांति के लिए समय निकालें।
गुरु छठे भाव में (26 नवंबर से 31 दिसंबर): सेहत और विरोधियों की छोटी परेशानियाँ, कर्ज़ लेने से बचें।
राहु दसवें भाव में (1 जनवरी से 31 दिसंबर): काम में तेज़ी और नए मौके, पर दफ़्तर की राजनीति से बचें।
सबसे अच्छा समय (गुरु शुभ भाव में): 1 जनवरी से 24 जनवरी, 26 जून से 25 नवंबर।
उपाय: शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जप करें, ज़रूरतमंदों की मदद करें।
शनि नौवें भाव में (1 जनवरी से 2 जून; 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर): भाग्य का साथ धीरे मिलेगा। बड़ों और गुरुजनों से जुड़े मामलों में धैर्य रखें, धर्म-कर्म में मन लगेगा।
शनि दसवें भाव में (3 जून से 19 अक्टूबर): काम का बोझ बढ़ेगा, पर मेहनत से पद और पहचान भी बनेगी।
गुरु दूसरे भाव में (1 जनवरी से 24 जनवरी; 26 जून से 25 नवंबर): धन, परिवार और वाणी के लिए शुभ समय। परिवार में मंगल काम हो सकते हैं।
गुरु पहले भाव में (25 जनवरी से 25 जून): आत्मविश्वास बढ़ेगा, पर जगह बदलने या खर्च के योग भी हैं। सेहत का ध्यान रखें।
गुरु तीसरे भाव में (26 नवंबर से 31 दिसंबर): मेहनत ज़्यादा करनी होगी, काम में बदलाव के योग।
राहु सातवें भाव में (1 जनवरी से 31 दिसंबर): साझेदारी और दांपत्य में गलतफ़हमी से बचें, समझौते सोच-समझकर करें।
सबसे अच्छा समय (गुरु शुभ भाव में): 1 जनवरी से 24 जनवरी, 26 जून से 25 नवंबर।
उपाय: सोमवार को राशि स्वामी चंद्र का मंत्र "ॐ सोमाय नमः" 108 बार जपें और रोज़ सुबह सूर्य को जल दें।
शनि आठवें भाव में (1 जनवरी से 2 जून; 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर): शनि की ढैया (अष्टम शनि): सेहत, यात्रा और अचानक खर्च से सावधान रहें। पुराने कामों से फ़ायदा मिल सकता है।
शनि नौवें भाव में (3 जून से 19 अक्टूबर): भाग्य का साथ धीरे मिलेगा। बड़ों और गुरुजनों से जुड़े मामलों में धैर्य रखें, धर्म-कर्म में मन लगेगा।
गुरु पहले भाव में (1 जनवरी से 24 जनवरी; 26 जून से 25 नवंबर): आत्मविश्वास बढ़ेगा, पर जगह बदलने या खर्च के योग भी हैं। सेहत का ध्यान रखें।
गुरु बारहवें भाव में (25 जनवरी से 25 जून): खर्च बढ़ेंगे, धर्म-कर्म और दान में रुचि रहेगी। बचत पर ध्यान दें।
गुरु दूसरे भाव में (26 नवंबर से 31 दिसंबर): धन, परिवार और वाणी के लिए शुभ समय। परिवार में मंगल काम हो सकते हैं।
राहु छठे भाव में (1 जनवरी से 31 दिसंबर): विरोधियों पर जीत, प्रतियोगिता और नौकरी में सफलता। बहुत शुभ।
सबसे अच्छा समय (गुरु शुभ भाव में): 26 नवंबर से 31 दिसंबर।
उपाय: शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जप करें, ज़रूरतमंदों की मदद करें।
शनि चौथे भाव में (1 जनवरी से 2 जून; 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर): शनि की ढैया (कंटक शनि): घर, वाहन और माता की सेहत को लेकर चिंता रह सकती है। संपत्ति के फ़ैसले सोच-समझकर लें।
शनि पाँचवें भाव में (3 जून से 19 अक्टूबर): पढ़ाई, संतान और नई योजनाओं में देरी हो सकती है। निवेश में जल्दबाज़ी न करें।
गुरु नौवें भाव में (1 जनवरी से 24 जनवरी; 26 जून से 25 नवंबर): भाग्य का साथ, धर्म-यात्रा और गुरु का आशीर्वाद। बहुत शुभ।
गुरु आठवें भाव में (25 जनवरी से 25 जून): अचानक खर्च या रुकावट आ सकती है, सेहत और यात्रा में सावधानी।
गुरु दसवें भाव में (26 नवंबर से 31 दिसंबर): काम में बदलाव और नई ज़िम्मेदारियाँ, जल्दबाज़ी में नौकरी न बदलें।
राहु दूसरे भाव में (1 जनवरी से 31 दिसंबर): वाणी और पैसों के मामलों में सावधानी, परिवार में गलतफ़हमी से बचें।
सबसे अच्छा समय (गुरु शुभ भाव में): 1 जनवरी से 24 जनवरी, 26 जून से 25 नवंबर।
उपाय: शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जप करें, ज़रूरतमंदों की मदद करें।
शनि तीसरे भाव में (1 जनवरी से 2 जून; 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर): हिम्मत बढ़ेगी और मेहनत का अच्छा फल मिलेगा। विरोधियों पर जीत और छोटी यात्राओं से लाभ के योग।
शनि चौथे भाव में (3 जून से 19 अक्टूबर): शनि की ढैया (कंटक शनि): घर, वाहन और माता की सेहत को लेकर चिंता रह सकती है। संपत्ति के फ़ैसले सोच-समझकर लें।
गुरु आठवें भाव में (1 जनवरी से 24 जनवरी; 26 जून से 25 नवंबर): अचानक खर्च या रुकावट आ सकती है, सेहत और यात्रा में सावधानी।
गुरु सातवें भाव में (25 जनवरी से 25 जून): विवाह और साझेदारी के लिए बहुत शुभ। अविवाहितों के लिए रिश्ते के योग।
गुरु नौवें भाव में (26 नवंबर से 31 दिसंबर): भाग्य का साथ, धर्म-यात्रा और गुरु का आशीर्वाद। बहुत शुभ।
राहु पहले भाव में (1 जनवरी से 31 दिसंबर): मन में बेचैनी और भ्रम हो सकता है, जल्दबाज़ी के फ़ैसलों से बचें।
सबसे अच्छा समय (गुरु शुभ भाव में): 25 जनवरी से 25 जून, 26 नवंबर से 31 दिसंबर।
उपाय: शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जप करें, ज़रूरतमंदों की मदद करें।
शनि दूसरे भाव में (1 जनवरी से 2 जून; 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर): साढ़ेसाती का आखिरी चरण: परिवार और धन के मामलों में संभलकर चलें, वाणी पर संयम रखें। धीरे-धीरे राहत मिलने लगेगी।
शनि तीसरे भाव में (3 जून से 19 अक्टूबर): हिम्मत बढ़ेगी और मेहनत का अच्छा फल मिलेगा। विरोधियों पर जीत और छोटी यात्राओं से लाभ के योग।
गुरु सातवें भाव में (1 जनवरी से 24 जनवरी; 26 जून से 25 नवंबर): विवाह और साझेदारी के लिए बहुत शुभ। अविवाहितों के लिए रिश्ते के योग।
गुरु छठे भाव में (25 जनवरी से 25 जून): सेहत और विरोधियों की छोटी परेशानियाँ, कर्ज़ लेने से बचें।
गुरु आठवें भाव में (26 नवंबर से 31 दिसंबर): अचानक खर्च या रुकावट आ सकती है, सेहत और यात्रा में सावधानी।
राहु बारहवें भाव में (1 जनवरी से 31 दिसंबर): खर्च, नींद की कमी और दूर की यात्रा के योग, फ़िज़ूलखर्ची से बचें।
सबसे अच्छा समय (गुरु शुभ भाव में): 1 जनवरी से 24 जनवरी, 26 जून से 25 नवंबर।
उपाय: शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जप करें, ज़रूरतमंदों की मदद करें।
शनि पहले भाव में (1 जनवरी से 2 जून; 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर): साढ़ेसाती का बीच वाला चरण: मेहनत ज़्यादा और नतीजे धीरे मिलेंगे। मन और सेहत पर दबाव रहेगा, धैर्य और अनुशासन से ही आगे बढ़ेंगे।
शनि दूसरे भाव में (3 जून से 19 अक्टूबर): साढ़ेसाती का आखिरी चरण: परिवार और धन के मामलों में संभलकर चलें, वाणी पर संयम रखें। धीरे-धीरे राहत मिलने लगेगी।
गुरु छठे भाव में (1 जनवरी से 24 जनवरी; 26 जून से 25 नवंबर): सेहत और विरोधियों की छोटी परेशानियाँ, कर्ज़ लेने से बचें।
गुरु पाँचवें भाव में (25 जनवरी से 25 जून): पढ़ाई, संतान और नई योजनाओं के लिए बहुत शुभ।
गुरु सातवें भाव में (26 नवंबर से 31 दिसंबर): विवाह और साझेदारी के लिए बहुत शुभ। अविवाहितों के लिए रिश्ते के योग।
राहु ग्यारहवें भाव में (1 जनवरी से 31 दिसंबर): अचानक लाभ और नए संपर्कों से फ़ायदा। बहुत शुभ।
सबसे अच्छा समय (गुरु शुभ भाव में): 25 जनवरी से 25 जून, 26 नवंबर से 31 दिसंबर।
उपाय: शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जप करें, ज़रूरतमंदों की मदद करें।
हर राशि के लिए देखा गया कि 2027 में शनि, गुरु और राहु चंद्र राशि से किस भाव में और कितने समय रहेंगे, और पारंपरिक गोचर नियमों से फल लिखा गया। यह सबके लिए सामान्य मार्गदर्शन है। आपकी जन्म कुंडली की महादशा और बाकी ग्रह भी असर डालते हैं, इसलिए बड़े फ़ैसले अपनी कुंडली और योग्य ज्योतिषी की सलाह से लें। हर साल अक्टूबर से यह पेज अपने आप अगले साल के राशिफल में बदल जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2027 में किन राशियों पर साढ़ेसाती है?
1 जनवरी से 2 जून तक (शनि मीन में): मेष, मीन और कुंभ; 3 जून से 19 अक्टूबर तक (शनि मेष में): वृषभ, मेष और मीन; 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक (शनि मीन में): मेष, मीन और कुंभ।
2027 में किन राशियों पर शनि की ढैया है?
1 जनवरी से 2 जून तक (शनि मीन में): धनु और सिंह; 3 जून से 19 अक्टूबर तक (शनि मेष में): मकर और कन्या; 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक (शनि मीन में): धनु और सिंह।
2027 में गुरु किस राशि में रहेगा?
गुरु (बृहस्पति) साल की शुरुआत से 24 जनवरी तक सिंह राशि में, 25 जनवरी से 25 जून तक कर्क राशि में (वक्री होकर वापस), 26 जून से 25 नवंबर तक सिंह राशि में, 26 नवंबर से साल के अंत तक कन्या राशि में रहेगा।
2027 में राहु-केतु किस राशि में हैं?
राहु पूरे साल मकर राशि में और केतु पूरे साल कर्क राशि में रहेगा।
2027 में किन राशियों का साल सबसे अच्छा है?
शनि, गुरु और राहु के गोचर के हिसाब से: मेष: सावधानी वाला, वृषभ: मिला-जुला, मिथुन: अच्छा, कर्क: मिला-जुला, सिंह: मिला-जुला, कन्या: सावधानी वाला, तुला: अच्छा, वृश्चिक: बहुत अच्छा, धनु: सावधानी वाला, मकर: अच्छा, कुंभ: मिला-जुला, मीन: मिला-जुला। यह चंद्र राशि पर आधारित सामान्य फल है।