सबद 1: गुरु चीन्हों गुरु चीन्ह् पुरोहित
शब्दवाणी का सबद 1 "गुरु चीन्हों गुरु चीन्ह् पुरोहित" से शुरू होता है। इसमें 10 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् गुरु चीन्हों गुरु चीन्ह् पुरोहित, गुरु मुख धर्म बखाणी।जो गुरु होयबा सहजे शीले शब्दे नादे वेदे, तिहिं गुरु का आलिंकार पिछणी।छव दरसण जिहिं के रूपण थापण, संसार बरतण निज कर थरप्या सो गुरु प्रत्यक्ष जांणी।जिहिं के खरतर गोठ निरोतर वाचा, रहिया रूद्र समाणी।गुरु आप संतोषी अवरां पोखी, तंत महारस बांणी।के के अलिया बासण होत हुतासण, तामैं खीर दूहीजूं।रसूवन गोरस घीय न लीयूं, न तहां दूध न पाणी।गुरु ध्याईरे ज्ञानी तोड़त मोहा, अति खुरसाणी छीजत लोहा।पांणी छल तेरी खाल पखाला, सतगुरु तोड़े मन का साला।सतगुरु है तो सहज पिछणी, कृष्ण चरित विन काचै करवै रह्यो न रहसी पांणी॥
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
सभी सबद
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 1 कौन सा है?
सबद 1 की पहली पंक्ति है: ओ३म् गुरु चीन्हों गुरु चीन्ह् पुरोहित, गुरु मुख धर्म बखाणी।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
