सबद 7: हिन्दू होय कै हरि क्यूं न जंप्यो
शब्दवाणी का सबद 7 "हिन्दू होय कै हरि क्यूं न जंप्यो" से शुरू होता है। इसमें 14 पंक्तियाँ हैं। नीचे गुरु जम्भेश्वर भगवान का यह सबद मूल पाठ में दिया गया है।
ओ३म् हिन्दू होय कै हरि क्यूं न जंप्यो, कांय दहदिश दिल पसरायो।सोम अमावस आदितवारी, कांय काटी बन रायों।गहण गहंते बहण बहंतै, निर्जल ग्यारस मूल बहंतै।कांयरे मुरखा तैं पालंग सेज निहाल बिछई।जा दिन तेरे होम जाप न तप न किरिया, जान कै भागी कपिला गाई।कूड़ तणों जे करतब कियो, ना तै लाव न सायों।भूला प्राणी आल बखाणी, न जंप्यो सुर रायो।छंदै का तो बहुता भावै, खरतर को पतियायो।हिव की बेला हिव न जाग्यो, शंक रह्यो कदरायो।ठाढ़ी बेला ठार न जाग्यो, ताती बेला तायो।बिम्बै बैला विष्णु न जंप्यो, ताछै का चीन्हौं कछु कमायो।अति आलस भोलावै भूला, न चीन्हों सुररायो।पार ब्रह्म की सुध न जांणी, तो नागे जोग न पायो।परशुराम के अर्थ न मूवा, ताकी निश्चै सरी न कायो।
शब्दवाणी का पाठ
बिश्नोई समाज में हवन के समय शब्दवाणी के सबदों का पाठ किया जाता है और हर सबद पूरा होने पर "स्वाहा" बोलकर आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, जागरण और पाहल के समय भी सबदों का पाठ होता है। अगली अमावस्या का समय बिश्नोई कैलेंडर में देखें। और पढ़ें: बिश्नोई समाज के 29 नियम • जाम्भोजी का इतिहास • जम्भेश्वर भगवान आरती
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी का सबद 7 कौन सा है?
सबद 7 की पहली पंक्ति है: ओ३म् हिन्दू होय कै हरि क्यूं न जंप्यो, कांय दहदिश दिल पसरायो।
शब्दवाणी में कुल कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं। सभी सबदों की सूची शब्दवाणी पेज पर है।
