शब्दवाणी: गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद
शब्दवाणी गुरु जम्भेश्वर भगवान (जाम्भोजी) के 120 सबदों का संग्रह है। हर सबद "ओ३म्" से शुरू होता है और बिश्नोई समाज में हवन, अमावस्या और जागरण के समय इनका पाठ होता है। नीचे सभी 120 सबद मूल पाठ में दिए गए हैं।
शब्दवाणी क्या है?
शब्दवाणी (सबदवाणी) गुरु जम्भेश्वर भगवान (जाम्भोजी) के श्रीमुख से निकले सबदों का संग्रह है। जाम्भोजी ने ये सबद अलग-अलग समय पर उनके पास आए लोगों के सवालों और प्रसंगों पर कहे। पहला सबद "गुरु चीन्हों गुरु चीन्ह पुरोहित" पीपासर में एक पुरोहित को सुनाया गया था। सबद मरुभाषा (पुरानी राजस्थानी) में हैं और इनमें विष्णु भक्ति, सदाचार, जीव दया और सच्चे गुरु की पहचान का उपदेश है।
बिश्नोई समाज में हवन के समय सबदों का पाठ करके आहुति दी जाती है। अमावस्या के व्रत, पाहल और जागरण में भी शब्दवाणी पढ़ी जाती है। हर सबद "ओ३म्" से शुरू होता है।
शब्दवाणी के सभी 120 सबद
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब्दवाणी में कितने सबद हैं?
शब्दवाणी में गुरु जम्भेश्वर भगवान के 120 सबद हैं।
शब्दवाणी का पहला सबद कौन सा है?
पहला सबद "ओ३म् गुरु चीन्हों गुरु चीन्ह् पुरोहित, गुरु मुख धर्म बखाणी" है। पूरा सबद 1 पढ़ें।
शब्दवाणी किस भाषा में है?
शब्दवाणी मरुभाषा यानी पुरानी राजस्थानी (मारवाड़ी) में है, जिसमें संस्कृत, हिंदी और कुछ फ़ारसी शब्द भी मिलते हैं।
शब्दवाणी का पाठ कब किया जाता है?
बिश्नोई समाज में हवन, अमावस्या के व्रत, पाहल और जागरण के समय शब्दवाणी का पाठ किया जाता है।
