
जगदम्बा के दीवानो को, दरश चाहिए: भजन (Jagdamba Ke Deewano Ko Daras Chahiye)
जगदम्बा के दीवानो को, दरश चाहिए, दरश चाहिए, हमें माँ तेरी एक,

जगदम्बा के दीवानो को, दरश चाहिए, दरश चाहिए, हमें माँ तेरी एक,

ऊँचे पर्वत चढ़कर जो, तेरे मंदिर आते हैं, मैया जी तेरी महिमा

हर बार तेरे दर पे, नव गीत सुनाएंगे, ढांढण वाली सुन ले,

सुन मेरी मात मेरी बात, छानी कोणी तेरे से, आँखड़ली चुराके मैया,

बच्चो से कभी मैया, यूँ रहती दूर नहीं, हम तो मजबूर है

पकड़ लो बाँह रघुराई, नहीं तो डूब जाएँगे । डगर ये अगम

ओढ़ के चुनरिया लाल, मैया जी मेरे घर आना, मैया जी मेरे

मैया आरासुरी करजो आशा पूरी म्हारी अम्बे, हूँ तो विनती करूँ जगदम्बे,

जय जगजननी माँ, भवानी मैय्या शारदा हो माँ, अंबे जगदंबे जगदंबिके, जग

साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम, अपने मन की

मैया तेरे चरणों की, अम्बे तेरे चरणों की, गर धूल जो मिल

जिस ओर नजर फेरूं दादी, चहुँ ओर नजारा तेरा है, सतियों में

सज धज बैठ्या दादीजी, लुन राई वारा, निजरा उतारा माँ की, निजरा

बीच भंवर में फसी मेरी नैया, तुम्ही हो खिवैया माँ, तुम्ही हो

उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहाँ जो सोवत है ।

मात भवानी अम्बे माँ, मेरी नैया भवर में है आ, तू संकट

राधिका गोरी से बिरज की छोरी से, मैया करादे मेरो ब्याह उम्र

सुख-वरण प्रभु, नारायण हे! दु:ख-हरण प्रभु, नारायण हे! तिरलोकपति, दाता, सुखधाम, स्वीकारो

हरि नाम नहीं तो जीना क्या अमृत है हरि नाम जगत में,

मैं रूप तेरे पर, आशिक हूँ, यह दिल तो तेरा, हुआ दीवाना