मेरे तन में भी राम,
मेरे मन में भी राम,
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे,
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे ॥
जैसे चंदा में राम,
जैसे सूरज में राम,
अम्बर तारों में समाया तेरा नाम रे,
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे ॥
जैसे भीलनी के राम,
जैसे मीरा के श्याम,
नर नारी में समाया तेरा नाम रे,
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे ॥
जैसे सीता के राम,
जैसे राधा के श्याम,
पत्ते पत्ते में समाया तेरा नाम रे,
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे ॥
जन मानस में गुंज रहा है, जय श्री राम: भजन (Jan Manas Mein Goonj Raha Hai Jai Shri Ram)
राम को देख कर के जनक नंदिनी: भजन (Ram Ko Dekh Ke Janak Nandini)
संत साहित्य ..(:- समराथल कथा भाग 15 🙂
मेरे तन में भी राम,
मेरे मन में भी राम,
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे,
मेरी सांसो में तेरा ही नाम रे ॥
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