साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥
जीवन का श्रृंगार है प्रीतम, माँग का सिन्दूर,
माँग का सिन्दूर,
जीवन का श्रृंगार है प्रीतम, माँग का सिन्दूर,
प्रीतम की नज़रों से गिरकर, जीना है किस काम,
प्रीतम की नज़रों से गिरकर, जीना है किस काम,
साँसों की, साँसों की,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥
प्रेम के रंग में ऐसी डूबी, बन गया एक ही रूप,
बन गया एक ही रूप,
प्रेम के रंग में ऐसी डूबी, बन गया एक ही रूप,
प्रेम की माला जपते जपते, आप बनी मैं श्याम,
प्रेम की माला जपते जपते, आप बनी मैं श्याम,
साँसों की, साँसों की,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥
प्रीतम का कुछ दोष नहीं है वो तो है निर्दोष,
वो तो है निर्दोष,
अपने आप से बातें कर के, हो गयी मैं बदनाम,
अपने आप से बातें कर के, हो गयी मैं बदनाम,
साँसों की, साँसों की,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥
प्रेम पियाला जब से पिया है, जी का है ये हाल,
जी का है ये हाल,
प्रेम पियाला जब से पिया है, जी का है ये हाल,
अंगारों पे नींद आ जाए, काँटों पे आराम,
अंगारों पे नींद आ जाए, काँटों पे आराम,
साँसों की, साँसों की,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥
बारिशों की छम छम में - नवरात्रि भजन (Barisho Ki Cham Cham Mein)
श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् (Vindhyeshwari Stotram)
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 28 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 28)
अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥








