
घर ऐसा देना माँ: भजन (Ghar Aisa Dena Maa)
घर ऐसा देना माँ, जो तेरे मंदिर जैसा हो, जैसा है भवन

घर ऐसा देना माँ, जो तेरे मंदिर जैसा हो, जैसा है भवन

भादी मावस है आई, भक्ता मिल ज्योत जगाई, चंग मजीरा बाजे आंगणे,

लग जाएगी लगन धीरे धीरे, मैया जी से होगा मिलन धीरे धीरे,

ध्यानु की तरह अम्बे, मेरा नाम अमर कर दो, चरणों में मिट

सिद्धिविनायक मंगलमूर्ति, विघ्नहरण सुखपाल जी, हे गजानन पधारो गौरी लाल जी, हे

पत राखो गौरी के लाल, हम तेरी शरण आये ॥ प्रथमे तुम्हे

गजानन आ जाओ एक बार, सभा में तुम्हें बुलाते है ॥ सबसे

गौरी के लाला हो, मेरे घर आ जाना, घर आँगन की ओ

हमको अपनी भारत की माटी से अनुपम प्यार है, माटी से अनुपम

जय जय गणराज मनाऊँ, चरणों में शीश नवाऊं, जब तक सांसे हैं

गिरिजा के छैया, गणपति तुम्हे पुकारूँ, पूजूं मैं तुम्हे, आरती तेरी उतारूँ,

जय जय गणपति गजानंद, तेरी जय होवे, जाऊं तोपे बलिहारी, तेरी जय

ओ बाबा तेरे भक्त बुलाये, आ जाओ गजानन प्यारे, आ जाओ गजानन

गजानन आए मेरे द्वार॥ श्लोक – वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभा, निर्विघ्नम कुरु

पधारो म्हारे अंगना जी ॥ दोहा – हे शंकर सुत गौरी के

उस ऊँचे मंदिरों वाली की, मेरी मैया मेहरो वाली की, मैं लाडली

भक्तों के घर कभी, आजा शेरावाली, कुटिया का मान, बढ़ा जा शेरावाली,

मन तेरा मंदिर आँखे दिया बाती, होंठो की हैं थालियां बोल फूल

जरा फूल बिछा दो आँगन में, मेरी मैया आने वाली है, मेरी

मैं तो संग जाऊं बनवास मैं तो संग जाऊं बनवास मैं तो