
तू प्यार का सागर है: भजन (Tu Pyar Ka Sagar Hai)
तू प्यार का सागर है, तेरी एक बूँद के प्यासे हम ।

तू प्यार का सागर है, तेरी एक बूँद के प्यासे हम ।

एक तमन्ना माँ है मेरी, दिल में बसा लूँ सूरत तेरी, हर

छोटी सी मेरी पार्वती, शंकर की पूजा करती थी, निर्जल रहकर निश्छल

तुझसा दयालु नहीं प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे ॥ श्रुति कहे जगत पिता

जहाँ पे बिन मांगे, पूरी हर मन्नत होती है, माँ के चरणों

माँगा है मैने मैया से, वरदान एक ही, तेरी कृपा बनी रहे,

मेरी वैष्णो मैया, तेरी महिमा अपरम्पार, कलियुग में हर प्राणी के, कलियुग

नैया चलाती हूँ, मैं बिगड़ी बनाती हूँ, अपने भक्तो का मैं, बेड़ा

साथी हारे का तू, मुझको भी श्याम जीता दे, मेरा ये नसीबा

आजु मिथिला नगरिया निहाल सखिया, चारों दुलहा में बड़का कमाल सखिया! शिश

राजी राजी राखो बाबा, फिर थारे दर पे आवा जी, भूल चूक

म्हारा घट मा बिराजता, श्रीनाथजी यमुनाजी महाप्रभुजी, म्हारो मनड़ो है गोकुल वृन्दावन,

तूने सिर पे धरा जो मेरे हाथ, के अब तेरा साथ नहीं

तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो । तुम्ही हो बंधू, सखा तुम्ही

तेरी करती रहूं मैं चाकरी, वरदान यही मैं चाहूँ, वरदान यही मैं

कैसे भूलूंगा मैया मैं तेरा उपकार, ऋणी रहेगा तेरा, ऋणी रहेगा तेरा

मैया आवेगी मैया आवेगी, सांचे मन से याद करोगा, रुक ना पावेगी,

मेरी भक्ति के बदले वचन देना, मुझे झुँझनु में अगला जनम देना

संकट में झुँझन वाली की, सकलाई देखि है, मेरे संग संग चलती,

मेरी नैया पार लगेगी, माँ खड़ी है तू उस पार, ना कोई