तारीखें जम्भ भक्ति के पंचांग (सूर्योदय की तिथि) से हैं और हर साल अपने आप अगले साल की हो जाती हैं।
गोगाजी, जिन्हें जाहरवीर गोगा और गोगा पीर भी कहा जाता है, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल तक पूजे जाने वाले लोकदेवता हैं। उनका जन्म चूरू ज़िले के ददरेवा में हुआ माना जाता है और हनुमानगढ़ ज़िले की गोगामेड़ी में उनकी समाधि है। उन्हें साँपों के देवता और गायों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। हिंदू और मुस्लिम दोनों उन्हें मानते हैं। भाद्रपद कृष्ण नवमी को गोगा नवमी मनाई जाती है।
गोगाजी: एक नज़र में
| पिता और माता | जेवर जी (चौहान) और बाछल |
| वंश | चौहान |
| जन्म स्थान | ददरेवा (शीर्ष मेड़ी), ज़िला चूरू |
| समाधि | गोगामेड़ी (धुरमेड़ी), नोहर, ज़िला हनुमानगढ़ |
| मुख्य पर्व | गोगा नवमी, भाद्रपद कृष्ण नवमी (पूर्णिमांत महीना) |
| दूसरे नाम | जाहरवीर, गोगा पीर, गोगा चौहान |
| मान्यता | साँप के ज़हर से रक्षा करने वाले, गायों के रक्षक |
गोगाजी की कथा
लोक कथाओं के अनुसार गोगाजी की माता बाछल को गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद से पुत्र प्राप्त हुआ। इसी कारण गोगाजी को गुरु गोरखनाथ का शिष्य भी माना जाता है। बड़े होकर वे एक वीर और न्यायप्रिय शासक बने।
कथा के अनुसार ज़मीन-जायदाद को लेकर उनके मौसेरे भाइयों अर्जन और सुर्जन से उनका संघर्ष हुआ। एक परंपरा यह भी बताती है कि उन्होंने गायों की रक्षा के लिए महमूद गज़नवी से युद्ध किया। गोगामेड़ी में उनकी समाधि बनी, जहाँ आज भी भारी मेला लगता है। मान्यता है कि गोगाजी का नाम लेने और उनकी पूजा करने से साँप का भय दूर होता है।
पूजा और परंपराएँ
- गोगा नवमी: भाद्रपद कृष्ण नवमी को घरों और थानों में गोगाजी की पूजा होती है। कई जगह मिट्टी से गोगाजी की घोड़े पर सवार मूर्ति बनाकर पूजी जाती है।
- थान: गाँवों में खेजड़ी के पेड़ के नीचे गोगाजी के थान बने होते हैं।
- नाग पूजा: साँपों से रक्षा के लिए गोगाजी के साथ नाग देवता की पूजा भी की जाती है।
- गोगामेड़ी मेला: भाद्रपद महीने में गोगामेड़ी में बड़ा मेला भरता है, जिसमें राजस्थान, हरियाणा और पंजाब से श्रद्धालु आते हैं।
गोगा नवमी कब है?
गोगा नवमी भाद्रपद कृष्ण नवमी को मनाई जाती है, यानी जन्माष्टमी के अगले दिन के आसपास। आने वाले सालों की तारीखें:
| पर्व या मेला | तारीख | तिथि | स्थान |
|---|---|---|---|
| गोगा नवमी | 26 अगस्त 2027, गुरुवार | भाद्रपद कृष्ण नवमी | गोगामेड़ी (हनुमानगढ़), ददरेवा (चूरू) |
| गोगा नवमी | 14 अगस्त 2028, सोमवार | भाद्रपद कृष्ण नवमी | गोगामेड़ी (हनुमानगढ़), ददरेवा (चूरू) |
| गोगा नवमी | 2 सितंबर 2029, रविवार | भाद्रपद कृष्ण नवमी | गोगामेड़ी (हनुमानगढ़), ददरेवा (चूरू) |
गोगामेड़ी और ददरेवा कैसे पहुँचें?
- गोगामेड़ी: हनुमानगढ़ ज़िले में नोहर के पास। गोगामेड़ी का अपना रेलवे स्टेशन है और नोहर, भादरा व हनुमानगढ़ से बसें चलती हैं।
- ददरेवा: चूरू ज़िले में राजगढ़ (सादुलपुर) के पास, जिसे गोगाजी का जन्मस्थान माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गोगा नवमी कब मनाई जाती है?
भाद्रपद कृष्ण नवमी को, जो आमतौर पर जन्माष्टमी के अगले दिन पड़ती है। इस साल की तारीख ऊपर दी गई है।
गोगाजी को जाहरवीर क्यों कहते हैं?
गोगाजी को ज़हर (जहर) से रक्षा करने वाले वीर के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उन्हें जाहरवीर कहा जाता है।
गोगामेड़ी कहाँ है?
राजस्थान के हनुमानगढ़ ज़िले में नोहर तहसील में। यहाँ गोगाजी की समाधि है।
गोगाजी के माता-पिता कौन थे?
पिता जेवर जी चौहान और माता बाछल।
गोगाजी को कौन मानता है?
हिंदू और मुस्लिम दोनों। राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और उत्तर प्रदेश में भी उनकी पूजा होती है।
यह जानकारी लोक परंपरा, इतिहास की पुस्तकों और समाज में प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। कई बातों पर अलग-अलग स्रोतों में थोड़ा अंतर मिलता है, ऐसी जगह हमने यह साफ़ लिखा है। कोई जानकारी गलत लगे या आप कुछ जोड़ना चाहें, तो हमें बताएँ। जाँच के बाद हम इसे ठीक करेंगे।
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