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वीर तेजाजी: कथा, तेजा दशमी, खरनाल और सुरसुरा धाम

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वीर तेजाजी: तेजाजी के थान का चित्र
तेजा दशमी 2027: 10 सितंबर 2027, शुक्रवार (भाद्रपद शुक्ल दशमी, खरनाल (नागौर), सुरसुरा (अजमेर), परबतसर)
तारीखें जम्भ भक्ति के पंचांग (सूर्योदय की तिथि) से हैं और हर साल अपने आप अगले साल की हो जाती हैं।

वीर तेजाजी राजस्थान के लोकदेवता हैं, जिन्हें गायों की रक्षा और अपने वचन के लिए प्राण देने के कारण पूजा जाता है। उनका जन्म नागौर ज़िले के खरनाल गाँव में हुआ था। जाट समाज में उनकी विशेष आस्था है, पर किसान और पशुपालक हर समाज में उन्हें मानते हैं। साँप के काटने से रक्षा के लिए लोग तेजाजी के नाम का धागा (तांती) बाँधते हैं। उनकी याद में भाद्रपद शुक्ल दशमी को तेजा दशमी मनाई जाती है।

वीर तेजाजी: एक नज़र में

जन्म स्थानखरनाल, ज़िला नागौर
जन्ममाघ शुक्ल चतुर्दशी, विक्रम संवत 1130 (कुछ स्रोत 1073 ई. और कुछ 1074 ई. लिखते हैं)
पिता और माताताहड़ जी और रामकुँवरी
गोत्रधौल्या (जाट)
ससुरालपनेर गाँव
देहांतसुरसुरा (किशनगढ़, अजमेर) में, भाद्रपद शुक्ल दशमी को
मुख्य पर्वतेजा दशमी, भाद्रपद शुक्ल दशमी
बड़ा मेलापरबतसर (नागौर) का पशु मेला
प्रतीकघोड़े पर सवार, हाथ में भाला

वीर तेजाजी की कथा

तेजाजी बचपन से ही बहादुर और वचन के पक्के थे। एक बार वे अपनी पत्नी को लेने ससुराल पनेर गए थे। उसी समय गाँव की गायें लुटेरे ले गए। कथा का सबसे प्रचलित रूप यह है कि ये गायें लाछा गूजरी की थीं। कुछ परंपराओं में इन्हें तेजाजी की बहन के ससुराल की गायें बताया गया है। गायों को छुड़ाने निकलते समय रास्ते में तेजाजी को आग में फँसा एक साँप मिला। तेजाजी ने उसे बचा लिया, पर साँप नाराज़ होकर उन्हें डसना चाहता था।

तेजाजी ने साँप से वचन दिया कि गायें छुड़ाकर वे खुद लौटकर आएँगे, तब वह उन्हें डस ले। उन्होंने लुटेरों से लड़कर सारी गायें छुड़ा लीं, पर उनका पूरा शरीर घावों से भर गया। वचन निभाने के लिए वे साँप के पास लौटे। शरीर पर कोई जगह खाली न देखकर उन्होंने अपनी जीभ आगे कर दी और साँप ने वहीं डसा।

तेजाजी की वचनबद्धता से प्रसन्न होकर साँप ने वरदान दिया कि जो भी तेजाजी के नाम का धागा बाँधेगा, उसे साँप का ज़हर नहीं चढ़ेगा। यह घटना भाद्रपद शुक्ल दशमी को सुरसुरा में हुई मानी जाती है। इसी दिन तेजा दशमी मनाई जाती है।

पूजा और परंपराएँ

  • तांती बाँधना: साँप या बिच्छू के काटने पर तेजाजी के थान पर धागा (तांती) बाँधने की परंपरा है। मान्यता के साथ-साथ ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है।
  • तेजा गायन: खेत में बुवाई के समय किसान तेजाजी के गीत (तेजा गायन) गाते हैं और अच्छी फसल की कामना करते हैं।
  • थान: राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई गाँवों में तेजाजी के थान हैं।
  • तेजा दशमी के मेले: खरनाल, सुरसुरा, परबतसर और ब्यावर समेत कई जगह मेले भरते हैं। परबतसर का पशु मेला राजस्थान के बड़े पशु मेलों में गिना जाता है।

तेजा दशमी कब है?

तेजा दशमी हर साल भाद्रपद शुक्ल दशमी को मनाई जाती है। आने वाले सालों की तारीखें:

पर्व या मेलातारीखतिथिस्थान
तेजा दशमी10 सितंबर 2027, शुक्रवारभाद्रपद शुक्ल दशमीखरनाल (नागौर), सुरसुरा (अजमेर), परबतसर
तेजा दशमी29 अगस्त 2028, मंगलवारभाद्रपद शुक्ल दशमीखरनाल (नागौर), सुरसुरा (अजमेर), परबतसर
तेजा दशमी17 सितंबर 2029, सोमवारभाद्रपद शुक्ल दशमीखरनाल (नागौर), सुरसुरा (अजमेर), परबतसर

खरनाल और सुरसुरा कैसे पहुँचें?

  • खरनाल: नागौर शहर से लगभग 15 किलोमीटर, नागौर-जोधपुर सड़क के पास। नागौर रेलवे स्टेशन सबसे पास है।
  • सुरसुरा: अजमेर ज़िले में किशनगढ़ के पास। किशनगढ़ रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग से पहुँच सकते हैं।
  • परबतसर: नागौर ज़िले में, जहाँ तेजा दशमी के आसपास बड़ा पशु मेला लगता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तेजा दशमी क्यों मनाई जाती है?

वीर तेजाजी ने गायों की रक्षा के बाद अपना वचन निभाते हुए साँप से डसवाकर प्राण दिए थे। यह घटना भाद्रपद शुक्ल दशमी को मानी जाती है, इसलिए उनकी याद में यह दिन तेजा दशमी के रूप में मनाया जाता है।

वीर तेजाजी का जन्म कहाँ हुआ था?

नागौर ज़िले के खरनाल गाँव में, माघ शुक्ल चतुर्दशी को। ज़्यादातर स्रोत विक्रम संवत 1130 बताते हैं।

तेजाजी के माता-पिता कौन थे?

पिता ताहड़ जी और माता रामकुँवरी।

तेजाजी का देहांत कहाँ हुआ?

अजमेर ज़िले में किशनगढ़ के पास सुरसुरा में, भाद्रपद शुक्ल दशमी को।

तेजाजी की तांती क्या होती है?

तेजाजी के नाम का धागा, जिसे साँप के काटने से रक्षा की मान्यता के साथ बाँधा जाता है। साँप के काटने पर सबसे पहले तुरंत अस्पताल जाएँ।

तेजाजी को किस समाज के लोग मानते हैं?

जाट समाज में उनकी विशेष आस्था है, लेकिन किसान, पशुपालक और कई समाजों के लोग उन्हें लोकदेवता के रूप में पूजते हैं।

यह जानकारी लोक परंपरा, इतिहास की पुस्तकों और समाज में प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। कई बातों पर अलग-अलग स्रोतों में थोड़ा अंतर मिलता है, ऐसी जगह हमने यह साफ़ लिखा है। कोई जानकारी गलत लगे या आप कुछ जोड़ना चाहें, तो हमें बताएँ। जाँच के बाद हम इसे ठीक करेंगे।

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